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नौकरी बचाने के लिए नामांकन की मनुहार

Sun, 24 Jul 2016 11:36 PM IST
पुनीत कुमार मिश्र/Sant Kabir Nagar
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उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तैनात अनुदेशक  अपनी नौकरी बचाने के लिए गांव में घूम-घूमकर अभिभावकों से बच्चों का नामांकन कराने के लिए मनुहार कर रहे हैं। जिससे स्कूल में छात्र संख्या 100 या इससे अधिक हो जाए और उनकी नौकरी पक्की रहे। चूंकि शासनादेश के अनुसार 100 छात्र संख्या वाले विद्यालय पर ही अनुदेशक रह सकते है।  वहीं हेडमास्टर सहयोग करने की बजाय अनुदेशकों पर दबाव बना रहे हैं।  
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गौरतलब है कि वर्ष 2013 में सात हजार मानदेय पर 100 या अधिक संख्या वाले उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अनुदेशकों की तैनाती की गई थी। जिसमें कला, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा, कंप्यूटर शिक्षा, गृह शिल्प, कृषि आदि विषयों से संबधित अनुदेशक शामिल हैं। जनपद के 100 से अधिक छात्र संख्या वाले 90 उच्च प्राथमिक विद्यालयों पर 265 अनुदेशकों की तैनाती हुई। वर्तमान समय में परिषदीय विद्यालयों में छात्र संख्या में गिरावट आई। इसका प्रभाव अनुदेशकों की तैनाती वाले विद्यालय पर भी पड़ा। 

लगभग 25 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या 70 से 85 के बीच पहुंच गई। छात्र संख्या कम होते देख अनुदेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें उभरने लगी। नामांकन को बढ़ाने के लिए प्रधानाध्यापक अनुदेशकों पर दबाव बना रहे हैं। हालात यह हैं कि प्रधानाध्यापक शासनादेश के हवाला देकर अनुदेशकों को हर हाल में छात्र संख्या बढ़ाने को कह रहे हैं और छात्र संख्या न बढ़ने पर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भी करने की बात कह रहे है। ऐसी स्थिति में अनुदेशक गांव- गांव जाकर लोगों से मनुहार कर रहे हैं कि और विद्यालयों में छात्रों को लाकर नामांकन करा रहे हैं ताकि उनकी नौकरी पक्की रहे। 
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बीएसए जगदीश शुक्ल ने कहा कि अनुदेशकों के साथ -साथ प्रधानाध्यापकों की भी छात्र संख्या बढ़ाने की जिम्मेदारी है। जिन विद्यालयों पर छात्र संख्या कम पाई जाएगी वहां    के प्रधानाध्यापक के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। स्कूलों में शत प्रतिशत नामांकन के लिए शिक्षक घर-घर जाकर लोगों को प्रेरित करें। 

 उच्च प्राथमिक अनुदेशक वेेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष  ओम नारायण शुक्ल ने कहा कि विद्यालयों पर नामांकन के लिए अनुदेशक काफी मेहनत कर रहे हैं। जबकि प्रधानाध्यापक अनुुदेशकों का कोई सहयोग नहीं कर रहे हैं। वे अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। फिलहाल सभी विद्यालयों में छात्र संख्या 100 के करीब पहुंच चुकी है। तीन अगस्त को विधान सभा का घेराव किया जाएगा और 100 की बाध्यता को खत्म करने की मांग की जाएगी। 
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