धनघटा/रोसया बाजार। सरयू नदी 37 मीलीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ रही है। इससे बाढ़ प्रभावित 32 गांवों के लोग सहमे हुए हैं। यह गांव नदी और तटबंध के बीच में बसे हैं।
बढ़ते जलस्तर के कारण नदी की उपधाराओं में अब पानी घुसने लगा हैं। इसके साथ ही नदी के तटवर्ती गांवों को जोड़ने वाले रास्ते भी डूबने लगे हैं। हालांकि नदी अभी खतरे के निशान से 1.70 मीटर नीचे बह रही है। पानी भिखारीपुर, गायघाट, करनपुर, कंचनपुर, कठहा, सीयरकला, ढोलबजा, चकदहा, भउआपार, गुनवतिया, सरैया, खड़गपुर, सियाराम अधीन, दौलतपुर, गुलहरिया, खालेपुरवा, लाल तुरकौलिया, आगापुर गुलरिहा, और गायघाट दक्षिणी गांवों के आसपास पहुंच रहा है।
यह पूरी तरह से डूब क्षेत्र में हैं और जब नदी की उपधाराओं में पानी भर जाता है तो यह गांव आसपास के क्षेत्रों से कट जाते हैं। भिखारीपुर के निवासी हरिराम बताते हैं कि सरयू नदी का जलस्तर जब बढ़ता है तो पहले उपधाराओं में ही पानी भरता है। वहीं तिलकधारी बताते हैं कि नदी के बढ़ने की गति यही रही तो चार से पांच दिन में नदी की तलहटी में मौजूद गांव मैरुंड हो जाएंगे। विकास खंड पौली में सरयू के जल में लगातार वृद्धि से पड़रिया व 30 घरों का केवटाही पुरवा, नकहा का 20 घरों का निषाद बस्ती, 200 घरों का नरायनपुर गांव, छपरा मगर्वी गांव का लगभग 80 घरों का कुर्मी टोला व कटहा-भिटहा गांव का 150 घरों का मदरहा पुरवा जहां का इलाका बाढ़ के पानी से घिर जाता है।
भोतहा, हरिवंशपुर, नकहा, तेजपुर, माझाखड़गपुर सहित एक दर्जन क्षेत्र के गांवों को भी बाढ़ प्रभावित करती है। बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों में छपरा मगरबी के झिनकान, बृजभान, बहादुर, लालमन, वीरेन्द्र, सन्त राम, पिन्टू, महेन्द्र, कल्लू, अजय बताते हैं कि पानी बढ़ने की गति बहुत तेज तो नहीं है, लेकिन लोग अपने सामान समेट रहे हैं।
वहीं लालजी, दिनेश , पुजारी, परशुराम, विनोद, अशोक, राम सुमेर सहित तमाम लोगो का कहना है कि हम लोग बहुत दिनों से इस परेशानी से झेलते चलें आ रहे हैं कई दिनों तक खेतों में बाढ़ का पानी भरने से अरहर, धान, सब्जी की खेती बर्बाद हो जाती है और चारे का संकट बढ़ जाता है।