संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। तहसील के दक्षिणी छोर से होकर बहने वाली सरयू का रौद्र रूप 17 वर्षों में लगातार तबाही मचा रहा है। नदी की तेज कटान अब तक पांच से ज्यादा गांवों और उनके पूरवे के अस्तित्व को समाप्त कर चुकी है। सरयू की कटान से सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि जहां नदी की धारा में समा चुकी है। सैकड़ों परिवार पुश्तैनी घर छोड़कर दूसरे स्थानों पर बस्तियां बसाने को मजबूर हैं। कटान का सिलसिला आज भी जारी है।
नदी का जलस्तर कम होने के बाद उपजाऊ जमीन कट कर नदी की धारा में समाती चली आ रही हैं। तटवर्ती गांव के लोग हर साल बाढ़ और कटान के भय के बीच जीवन बिताने को विवश है। धनघटा क्षेत्र में साल 2013 में कटान ने विकराल रूप धारण किया। कटान ने तुरकौलिया नायक गांव की अस्तित्व को मिटाते हुए 500 बीघा से अधिक जमीन काटकर नदी ने अपने धारा में मिला ली।
वीरेंद्र यादव बताते हैं कि डेढ़ सौ से अधिक घर नदी की धारा में समा गए तो करीब दो किलोमीटर दूर रामजंगला में गांव में लोग बसाए गए। इसी तरह भिखारीपुर, गायघाट दक्षिणी, तुरकौलिया लाल, अशरफपुर गांव का एक पुरवा नदी की धारा में समाहित हो गए थे। भिखारीपुर करीब 200 बस्ती वाला गांव पूरी तरह नदी की धारा में समाहित हो गया था।
भिखारीपुर निवासी रामलोचन बताते हैं कि कटान के कारण मूल बस्ती कटान के भेंट चढ़ गई। गायघाट दक्षिणी में सौ से अधिक मकान नदी के धारा में समा चुके हैं। दौलतपुर गांव निवासी शिवप्रसाद, रामदीन बताते हैं कि उनके गांव की करीब 200 बीघा उपजाऊ जमीन कट चुकी है। नदी का पानी जब घटना है तो कटान होती है।
गायघाट दक्षिणी के लोग करीब पांच किलोमीटर दूर जिगिना गांव के पास बसा तो दिए गए हैं लेकिन मूलभूत सुविधाओं से आज भी वंचित हैं। पिछले वर्ष गायघाट दक्षिणी के सात लोगों का मकान नदी की धारा में समाहित हो गया था। वह लोग आज भी गांव के पास एक जमीन पर छप्पर डालकर जीवन गुजर बसर कर रहे हैं।