सुविधाओं के अभाव से नाराज अधिवक्ताओं ने किया प्रदर्शन
- परिसर से चाय और फोटो कॉपी की दुकानें हटाए जाने से नाराजगी
- अधिकारियों और जिला जज के समझाने पर भी नहीं माने अधिवक्ता
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। बुधवार को दीवानी न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। मुख्य द्वार पर दिन भर अधिवक्ता आंदोलित रहे। बीच-बीच में अधिवक्ता सरकार विरोधी नारे भी लगाए। अधिवक्ता दीवानी न्यायालय परिसर में मूलभूत सुविधाओं की कमी की पूर्ति नहीं होने से नाराज थे। मान मनौव्वल के लिए एसपी, एडीएम, एएसपी और सीओ के अलावा जिला जज भी पहुंचे, लेकिन अधिवक्ता अपनी मांग पर अड़े रहे।
सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष महीप बहादुर पाल और जनपद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कृष्ण मोहन मिश्र की अगुवाई में पहले अधिवक्ताओं ने बैठक किया। जिसमें न्यायालय परिसर से अस्थाई चाय और फोटो कॉपी की दुकानों को हटाए जाने पर नाराजगी जताई। अधिवक्ताओं के बैठने के स्थान से न्यायालय भवन की दूरी अधिक होने और छॉजन की व्यवस्था न होने से परेशानी का जिक्र किया। पीने के पानी का भी समुचित इंतजाम नहीं होने की बात दोहराई। बैठक में ही अधिवक्ताओं ने इस मुद्दे को लेकर आंदोलन छेड़ने की रणनीति तय की और फिर प्रदर्शन किया। अधिवक्ता नारेबाजी करते हुए न्यायालय प्रवेश द्वार पर इकट्ठा हुए और धरने पर बैठ गए। दोनों अधिवक्ता संगठनों के अध्यक्ष ने कहा कि अचानक बिना कोई समुचित वैकल्पिक व्यवस्था किए ही चाय और फोटो कॉपी की दुकानों को हटाए जाने से अधिवक्ताओं व वाद कारियों को परेशानी होगी। परिसर में न तो कोई कैंटीन है और न ही वाहन खड़े किए जाने के लिए स्टैंड है। पीने के पानी तक की समुचित व्यवस्था नहीं है। अंदर प्रवेश के लिए वादकारियों को पास के नाम पर प्रताड़ित किया जा रहा है। सूचना पर एसपी ब्रजेश सिंह, एडीएम संजय पांडेय, एएसपी असित श्रीवास्तव और सीओ आनंद कुमार पांडेय के साथ काफी संख्या में पुलिस कर्मी पहुंच गए। अधिकारियों ने अधिवक्ताओं से वार्ता करके आंदोलन समाप्त कराने की कोशिश की, लेकिन अधिवक्ता अपनी मांग को जिला जज से वार्ता करने को अड़े रहे। जिला जज जय शंकर मिश्र भी अधिवक्ताओं के बीच पहुंचे और उनकी समस्याएं सुनी। जिला जज ने हाईकोर्ट के निर्देशों का हवाला देकर अधिवक्ताओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन अधिवक्ता अपनी मांग पर अड़े रहे। समस्या का कोई सार्थक समाधान नहीं निकला। अधिवक्ताओं ने मूलभूत सुविधाओं की पूर्ति होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया।
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कोर्ट रूम में रहा सन्नाटा
अधिवक्ताआें के आंदोलन की वजह से कोर्ट रूम में सन्नाटा पसरा रहा। बुधवार को विभिन्न कोर्ट में करीब 1200 मुकदमों की सुनवाई होनी थी। लेकिन कोई भी वादकारी और अधिवक्ता मुख्य द्वार से न्यायालय कक्ष में नहीं जा पाए। इन मुकदमों में सिर्फ तारीखें पड़ी। किसी भी मामले में अधिवक्ता पैरवी पर नहीं गए। कई मामलों में पूर्व में जमानत स्वीकृत होने के बाद भी जमानतदार प्रस्तुत नहीं हुए, जिसकी वजह से बस्ती जेल में निरुद्घ बंदियों की रिहाई नहीं हो पाई। होली नजदीक है और छुट्टी भी होगी। इस लिए परिसर में वादकारियों की अधिक भीड़ जुटी थी, लेकिन उन्हें निराश वापस लौटना पड़ा।