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मास्क और पीपीई किट बनाकर महिलाएं बढ़ा रही आय

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मास्क और पीपीई किट बनाकर महिलाएं बढ़ा रही आय - लोवर और चड्ढी बनाकर बरदहिया बाजार में बेचती है - परिषदीय स्कूलों के बच्चों का ड्रेस सिलाई का भी मिला है काम अमर उजाला ब्यूरो संतकबीरनगर। घर का कामकाज निपटाने के बाद खाली वक्त का सदुपयोग हो और आमदनी भी बढ़े। इसी सोच के साथ विकास खंड बघौली के हरदी गांव की रहने वाली शकीला खातून ने एक साल पहले मुस्कान महिला स्वयं सहायता समूह का गठन किया। समूह से 12 महिलाएं जुड़ी है। पहले लोवर और चड्ढी बनाने का काम शुरू किया। जबकि कोरोना संक्रमण काल में मास्क और पीपीई किट बनाने के काम में महिलाएं जुटी है। अब तक करीब 50 हजार मास्क और 3000 पीपीई किट बनाकर पुलिस,स्वास्थ्य विभाग,विकास विभाग और ग्राम पंचायतों के अलावा प्राइवेट नर्सिग होम को आपूर्ति दे चुकी है। मुस्कान स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष शकीला खातून बताती है कि गांव की महिलाएं हूनरमंद हो और आत्म निर्भर बने,ऐसी सोच उनके अंदर है। प्रधानपति मोहम्मद जाबिर की प्रेरणा से समूह गठित की और होजरी का काम महिलाए शुरू की। लोवर और चड्ढी महिलाएं बनाती है और फिर उसे बरदहिया बाजार खलीलाबाद में बेचा जाता है। इधर मार्च में कोरोना संक्रमण की शुरूआत हुई तो मास्क को लेकर हायतौबा मचने लगा। समूह की महिलाओं ने मास्क बनाने की पेशकश की। फिर दो लेयर का मास्क बनाने का काम शुरू किया। डीआरडीए के परियोजना निदेशक प्रमोद यादव और पूर्व डीएम रवीश गुप्त ने मास्क को गुणवत्तापूर्ण बताते हुए काम को आगे बढ़ाने की अनुमति प्रदान की। बाद में परियोजना निदेशक ने पीपीई किट बनाने के लिए प्रेरित किया और कपडे आदि उपलबध कराया। नए पीपीई किट को खोल कर समूह की महिलाओं ने उसकी कटिंग सींखी और फिर पीपीई किट बनाने का काम शुरू की। अब तक करीब 50 हजार मास्क और 3000 पीपीई किट बनाकर आपूर्ति दी जा चुकी है। पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, ग्राम पंचायतों के अलावा प्राइवेट नर्सिंग होम में मास्क और पीपीई किट की आपूर्ति दी गई। प्रति पीपीई किट में 100 रुपये की आमदनी होती है। जबकि पांच रूपये प्रति मास्क की बचत होती है। परिषदीय स्कूल के बच्चों का ड्रेस सिलाई काम भी मिला है।
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