गरीबी और मुफलिसी ने आत्मनिर्भर बनने का दिखाया सपना
- डेयरी उद्योग से जुड़कर समूह की महिलाएं कमा रही 18,000 रूपये प्रतिमाह
- कोरोना संक्रमण के दौर में मास्क बनाकर भी बेच रही महिलाएं
अमर उजाला ब्यूरो
हरिहरपुर/ संतकबीरनगर। गरीबी और मुफलिसी के चलते जब परिवार की परवरिश मुश्किल होने लगी तब खुद कुछ कमाने की ललक ने समूह गठन की राह दिखाई। यह कहना है खलीलाबाद ब्लॉक क्षेत्र के इमिलडीहा गांव में गठित गौरी महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष शर्मिला का। उन्होंने बताया की उनके पति मजदूरी करके परिवार की जीविका चला रहे थे। जब घर में तीन बच्चे और सास ससुर की परवरिश में काफी परेशानी होने लगी, तब उन्होंने समूह बनाने का निर्णय लिया। समूह की सभी बारह महिला सदस्य आत्मनिर्भर होकर परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियॉ निभा रही है।
समूह की अध्यक्ष शर्मिला बताती है कि लगभग दो साल पूर्व खलीलाबाद के इमिलडीहा में गौरी महिला स्वयं सहायता समूह का गठन हुआ । डेयरी उद्योग से जुड़े इस समूह में कुल बारह महिला सदस्य हैं। प्रतिदिन करीब बीस लीटर दूध का उत्पादन समूह की महिलाओं के जरिए किया जाता है। रोजाना करीब छह सौ रूपये कीमत का दूध बिक जाता है । इस समय समूह में कुल तेरह दुधारू पशु हैं। जिनमें बारह भैंस और एक गाय है । समूह की अध्यक्ष शर्मिला बताती हैं कि समूह में शामिल सभी महिला सदस्य डेयरी उद्योग से जुड़कर परिवार का खर्चा चला रही हैं। वैसे कोरोना संक्रमण काल में मास्क बनाने का बेचने का काम भी कर रही है। अब तक करीब 1000 मास्क बनाकर बेच चुकी है। डेयरी उद्योग से जुड़े अन्य उत्पाद जैसे पनीर,खोवा और घी का भी उत्पादन करने का लक्ष्य है। जिससे समूह को और आमदनी हो सके। इसके अलावा समूह को परिषदीय स्कूल का ड्रेस सिलने और बिजली बिल जमा कराने की जिम्मेदारी मिल रही है। इसके लिए भी प्रयास करेंगी।