संतकबीरनगर। एचआरपीजी कॉलेज खलीलाबाद में रविवार को संस्कृत भारती गोरक्ष प्रांत का आवासीय संस्कृत प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ हुआ, जिसमें युवाओं को संस्कृत से जोड़ने और बोलने पर जोर दिया गया।
प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन एसडीएम रवींद्र कुमार ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल पूजापाठ और कर्मकांड की भाषा नहीं है। ज्ञान विज्ञान की भाषा है। यह अध्यात्म की भाषा है। उन्होंने यह भी कहा कि संस्कृत के पठन पाठन से सांस्कृतिक व वैज्ञानिक समझ विकसित होती है। दूर से कठिन दिखती है किंतु वास्तव में यह सरल व सहज भाषा है।
संस्कृत भारती के अखिल भारतीय पत्राचार योजना प्रमुख हुलास जी ने कहा कि सृष्टि के आरंभ में संस्कृत ही जनभाषा थी। यह ओमकार से नि:सृत भाषा है। लंबे समय में यह भाषा श्रुत परंपरा में रही है। धीरे-धीरे यह सूत्र रूप में लेखन परंपरा को आत्मसात किया। उन्होंने कहा कि महर्षि पाणिनि ने भाषा की अराजकता को रोकने का कार्य किया।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ब्रजेश त्रिपाठी ने कहा कि भाषा वही अच्छी मानी जाती है जो किसी भाषा से आए श्रेष्ठ भावों और विचारों को आत्मसात कर लेती है। हमारी संस्कृत भाषा इसका उत्कृष्ट उदाहरण है। धनघटा विधायक गणेश चौहान ने कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों को अपनी महान भाषा संस्कृत में ही शपथ लेकर पुरानी भाषा संस्कृत को पुनर्जीवित करने में सहयोग करना चाहिए।
अतिथियों का आभार संस्कृत भारती के प्रांत सह मंत्री नागेश दुबे किया। इस अवसर पर प्रांत संगठन मंत्री प्रकाश झा, विनोद कुमार त्रिपाठी, संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो विजय कृष्ण ओझा, अरविंद प्रवोध मिश्र पूर्व प्राचार्य, चंद्रमौलि त्रिपाठी, अभिषेक पांडेय, अनित कुमार पांडेय, श्रीप्रकाश ओझा, वापूनंदन, सत्यम तिवारी आदि लोग मौजूद रहे।