संतकबीरनगर। गांवों को साफ- सुधरा रखने की मंशा पर पानी फिर रहा है। वजह यह है कि गांवों में तैनात सफाईकर्मी नियमित साफ-सफाई नहीं करते। विभाग को रोस्टर के जरिये गांवों में सफाई करानी पड़ती है, जबकि प्रत्येक माह उनके वेतन पर पांच करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।
जिले में पहले 754 ग्राम पंचायतें और 1637 राजस्व गांव थे। इधर जिले में नई नगर पंचायतों का सृजन हुआ तो ग्राम पंचायतों की संख्या घटकर 730 और राजस्व गांव 1485 रह गए। शासन ने गांवों को साफ-सुथरा रखने के लिए जिले में 1711 सफाई कर्मियों की नियुक्ति की है। इसमें से 65 से अधिक सफाई कर्मियों को विकास भवन, कलक्ट्रेट समेत विभिन्न सरकारी कार्यालयों में संबंद्ध कर दिया गया है।
आए दिन ब्लॉक से लेकर डीपीआरओ कार्यालय तक सफाई नहीं होने की शिकायतें पहुंचती हैं। दूसरी तरफ विभाग को रोस्टर के जरिये गांवों की सफाई करानी पड़ती है। इधर विभाग ने ऐसे गांवों को चिह्नित किया है, जहां सफाईकर्मी का पद रिक्त था। 300 से अधिक आबादी वाले गांवों में सफाई कर्मियों की तैनाती की गई। पूछने पर ब्लॉकों में तैनात एडीओ पंचायत यहीं बताते हैं कि सफाई कर्मियों की उपस्थित जांची जाती है।
हैंसर बाजार ब्लॉक में हुई जांच में 21 सफाईकर्मी अनुपस्थित पाए गए थे। ऐसे में सवाल यह है कि जब सफाईकर्मी नियमित गांव में जाते ही नहीं तो साफ-सफाई कार्य कैसे होगा।
जिले के प्रत्येक गांवों में सफाई कर्मियों की तैनाती है। उन्हें निर्देश हैं कि तैनाती वाले गांवों में नियमित सफाई करें। एडीओ पंचायत को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। खुद भी गांवों का भ्रमण कर सफाई का जायजा लेते रहते हैं। यदि कहीं सफाई कार्य नहीं करने की शिकायत मिली तो जांच कराई जाएगी। अभी हाल ही में रिक्त गांवों में 119 सफाई कर्मियों की तैनाती की गई है।
- प्रमोद यादव, डीपीआरओ