महुली। क्षेत्र के मुखलिसपुर में स्थित ठाकुरद्वारा रामजानकी मंदिर के नवनियुक्त महंत की ताजपोशी के दौरान साध्वी ने हंगामा कर दिया। साध्वी के हाईवोल्टेज ड्रामे से मौके पर अफरातफरी का माहौल रहा। मामले को शांत कराने में पुलिस और प्रशासन के पसीने छूट गए। काफी देर की मशक्कत के बाद स्थिति सामान्य हुई।
मुखलिसपुर स्थित ठाकुरद्वारा मंदिर के नवनियुक्त महंत सुनीक्ष्ण मुनि की सोमवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत ताजपोशी होनी थी। इस तिलक चद्दर समारोह में उज्जैन से गादीपती महंत विनीत गिरी और उदासीन ऋषि संगत आश्रम रानोपाली अयोध्या के महंत डाॅ. स्वामी भरत दास की मौजूदगी में जैसे ही ताजपोशी शुरू हुई तो मंच पर इसी मंदिर की साध्वी रिंकी दास ने माइक पर कुछ बोलना चाहा।
साध्वी के बोलने से पहले ही आयोजक मंडल ने माइक बंद कर दिया और मौजूद लोगों की भीड़ के शोरगुल और नारेबाजी के बीच उनकी आवाज दब गई। साध्वी मंच से नीचे उतर कर ठाकुरद्वारा के मुख्य मंदिर में खुद को बंद कर लिया। किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए मौके पर मौजूद एसओ दुर्गेश पांडेय अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे और गेट खुलवाने का प्रयास करने लगे।
साध्वी आवेश में अपनी बात रखना चाहती थीं, लेकिन शोर शराबे के चलते उनकी बातें साफ नहीं हो रही थीं। पुलिस की मान मनव्वल के बीच साध्वी ने बड़ी तेजी से खुद को मंदिर के गर्भ गृह में कैद कर लिया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने बलपूर्वक गेट खोला और साध्वी को समझा-बुझाकर बाहर ले आई। स्थिति गंभीर देख धनघटा पुलिस और बड़ी संख्या में महिला फोर्स भी मंगा ली गई।
तहसीलदार रामजी और एसओ एक कमरे में महिला पुलिस की मौजूदगी में साध्वी को समझाने में जुटे रहे। हंगामे के बीच नवनियुक्त महंत की ताजपोशी कर दी गई। बाद में प्रशासन के हस्तक्षेप और नवनियुक्त महंत द्वारा रिंकी दास को भी मंदिर में रहकर पूजा पाठ करने की अनुमति देने के बाद विवाद का पटाक्षेप हुआ।
इस दौरान विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी नीलमणि, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मनोज अग्रहरि, अरुणेश द्विवेदी, बिंदेश्वरी दूबे, रिंकू दूबे, कल्याण सिंह यादव, त्रिपुरारी तिवारी सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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यह है पूरा मामला
मुखलिसपुर स्थित ठाकुरद्वारा के पूर्व महंत कमल दास के निधन के बाद से महंत पद को लेकर सरगर्मी तेज हो गई थी। साध्वी रिंकी दास खुद को दिवंगत महंत की शिष्या बता कर दावेदारी पेश करने लगीं। उनका दावा था कि 15 वर्षों से वह महंत की सेवा करती आ रही थीं, जिसका गांव के कुछ लोग विरोध करने लगे। बताया जाता है कि स्थानीय कुछ मठों के महंत और सामाजिक लोगों ने इकट्ठा होकर रिंकीदास को महंत घोषित कर दिया। मुखलिसपुर ठाकुर द्वारा का मंदिर अयोध्या स्थित श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन ऋषि संगत आश्रम रानोपाली से संचालित होता है। ऐसे में ठाकुरद्वारा के महंत की गद्दी के लिए रानोपाली से सुतीक्ष्ण मुनि के नाम का ऐलान हो गया।
सोमवार को शीर्ष संतों की मौजूदगी में उनकी ताजपोशी का आयोजन किया गया था।
भगवामय हुआ कार्यक्रम, कस्बे में निकाली शोभायात्रा
श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन ऋषि संगत आश्रम रानोपाली अयोध्या की ठाकुरद्वारा मुखलिसपुर में संत सम्मेलन एवं नव नियुक्त महंत के तिलक चद्दर/ महंथी समारोह में पधारे उज्जैन के गादीपती महंथ विनीत गिरी जी महाकाल और डॉ. स्वामी भरत दास महाराज उदासीन ऋषि संगत आश्रम रानोपाली अयोध्या के आगमन में मुखलिसपुर कस्बे में शोभायात्रा निकाली गई। समूचा कस्बा भगवामय नजर आया। अपने-अपने घरों से निकल कर लोग इस शोभायात्रा पर पुष्प वर्षा करते नजर आए। भगवान श्रीराम और महावीर हनुमान के जयकारे के उद्घोष से समूचा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। नव नियुक्त महंत सुतीक्ष्ण मुनि ने सभी श्रद्धालुओं का आभार प्रकट करते हुए धर्म के पथ पर चलकर जनसेवा का भरोसा दिलाया।