खलीलाबाद में लंबी दूरी की 20 ट्रेनों का होता है ठहराव
1000 से 1500 यात्री प्रतिदिन करते हैं सफर
संतकबीरनगर। खलीलाबाद रेलवे स्टेशन की सुरक्षा करने वाले आरपीएफ कर्मी अव्यवस्थाओं की मार झेल रहे हैं। यहां चल रही आरपीएफ की चौकी किसी समय नमक का गोदाम हुआ करती थी। चौकी के लिए मिले कमरे की दीवारों में दरारें पड़ गईं हैं। जवानों के रहने के लिए बना बैरक भी जर्जर है।
आरपीएफ की चौकी में छत नहीं हैं। कार्यालय में जवानों को टिन शेड के नीचे बैैठना पड़ता है। गर्मी में तपिश तो बारिश में बाढ़ के अनुभव का सामना करना पड़ता है। बारिश के दिनों में कार्यालय भवन का छत टपकताहहै। चौकी में आगंतुक कक्ष नहीं है। यहां महिला बैरक और हवालात भी नहीं बना है।
रात-बिरात अगर कोई आरोपी यहां से फरार हो जाए तो आश्चर्य की बात नहीं होगी। खलीलाबाद स्टेशन से संबद्ध कोई भी चाइल्ड लाइन नहीं है। यहां मुक्त कराए गए बालकों-बालिकाओं को बस्ती से चाइल्ड लाइन बुलाकर सौंपना पड़ता है। पूर्वोत्तर रेलवे के प्रमुख स्टेशनों में शामिल खलीलाबाद रेलवे स्टेशन पर लंबी दूरी की 20 ट्रेनों का ठहराव होता है। रोज करीब 1,500 यात्री विभिन्न शहरों के लिए ट्रेन पकड़ते हैं, लेकिन यात्री और उनके सामानों की सुरक्षा करने वाले जवान इन अव्यवस्थाओं के आगे लाचार हैं। संवाद
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बैरक से 100 मीटर दूर झाड़ियों में बना है शौचालय
जवानों के लिए बना एकमात्र शौचालय बैरक से करीब 100 मीटर दूर है। शौचालय के आसपास जंगली झाड़ियां उग आईं हैं। आए दिन यहां सांप और बिच्छू निकलते रहते हैं। बारिश के दिनों में शौचालय तक जाने में पूरा शरीर भीग जाता है। एक जवान ने बताया कि एक ही शौचालय होने के कारण बहुत परेशानी होती है। आपात स्थिति में खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है।
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महिला सफाई कर्मी पकड़ती हैं महिला आरोपी
खलीलाबाद रेलवे स्टेशन की आरपीएफ चौकी में एक भी महिला सिपाही की तैनाती नहीं है। अगर यहां कोई महिला अपराध करते पाई जाती है तो उसे पकड़ने के लिए आरपीएफ को महिला सफाई कर्मियों का सहारा लेना पड़ता है। महिला हवालात न होने के कारण उन्हें स्टेशन मास्टर के कमरे में बैठाना पड़ता है।
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लाइट जाते ही बंद हो जाती है सीसीटीवी की निगरानी
स्टेशन की निगरानी करने के लिए लगे सीसीटीवी लाइट जाते ही रिकार्डिंग करना बंद कर देते हैं। कैमरों को बैकअप पावर देने के लिए लगा यूपीएस दो माह पूर्व ही जल चुका है। हां अगर कोई गंभीर अपराध हो जाए तो आरपीएफ को इसकी भनक तक नहीं लगेगी। सीसीटीवी से निगरानी के लिए एक कमरे तक की व्यवस्था नहीं है। लॉबी में जर्जर दीवारों पर एलईडी स्क्रीन टंगी है।
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कोट
सीसीटीवी कक्ष और बैरक निर्माण के लिए डीआरएम से पत्राचार किया गया है। महिला सिपाहियों की कमी के चलते तैनाती नहीं हो पा रही है। आरोपियों को बस्ती लाकर आगे की कार्रवाई की जाती है। समस्याएं उच्चाधिकारियों के संज्ञान में हैं।
- संजय मिश्रा, इंस्पेक्टर, थाना आरपीएफ, बस्ती