मेंहदावल। स्थानीय विकास खंड के बीएमसीटी मार्ग निर्माण में किसानों की कई एकड़ जमीन जाने के बाद भी अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया है। दर्जनों बार किसानों ने मुआवजे को लेकर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि व स्थानीय जिला प्रशासन को दर्जनों बार प्रार्थना पत्र भी दिया और आंदोलन करके ज्ञापन भी सौंपा।
इसके बावजूद अब तक मुआवजा न मिलने से नाराज किसानों ने मंगलवार को बीमापार चौराहे के समीप बीएमसीटी मार्ग को अवरुद्ध करते हुए प्रदर्शन करने लगे। सूचना पर एक घंटे बाद आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों का मान-मनौवल कर ज्ञापन लेने के बाद मामला शांत हुआ। इस दौरान मार्ग अवरुद्ध होने से वाहनों की लंबी कतार लग गई।
क्षेत्रीय किसान मोहम्मद शमीम, चंचल दूबे, अनिल कुमार, राजन सिंह ब्रह्मदेव पांडेय, हरिश्चंद्र मौर्या, राजन ने जनप्रतिनिधियों व जिला प्रशासन की हीलाहवाली को देखते हुए एकजुट होकर बीमापार चौराहे के समीप बीएमसीटी मार्ग को अवरुद्ध करते हुए धरने पर बैठ गए और शासन/प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हुए नारेबाजी शु़रू कर दी।
किसानों का कहना था कि बाईपास मार्ग निर्माण के दौरान ही किसानों की कीमती कृषि योग्य जमीन अधिगृहित करते हुए मार्ग का निर्माण करा दिया। वर्तमान में बाईपास मार्ग को बीएमसीटी मार्ग की स्वीकृति मिलने के बाद मार्ग का चौड़ीकरण करते हुए मार्ग का निर्माण कराने के दौरान ही किसानों ने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि व जिलाधिकारी आदि को प्रार्थना पत्र देकर मुआवजा दिलाने की मांग उठाई थी।
बीएमसीटी मार्ग निर्माण पूर्ण होने के 15 माह बाद भी किसानों का मुआवजा अब तक नहीं मिल पाया। जिला प्रशासन शासन मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया के नाम पर क्षेत्रीय किसानों को धोखा देने का काम कर रही है।
मार्ग जाम की सूचना पर मौके पर पहुंचे थानाध्यक्ष सुधीर सिंह ने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसान अपने मांगों पर अड़े रहे और उपजिलाधिकारी को बुलाने पर डटे रहे। एसओ की सूचना पर एक घंटे बाद पहुंचे उपजिलाधिकारी रामजीवन को किसानों ने मुआवजा संबंधी ज्ञापन सौंपा।
तब जाकर मार्ग जाम खत्म हो पाया। इस अवसर पर रमेश भारती, तूफानी, पुजारी, सुदामा, प्रभु, कुमारे, छठ्ठू, विजयनाथ, मकोदर, शिवकुमार, जगदीश, विनय कुमार दूबे, झीनकी निषाद, प्रमिला, खदावरी, उषा, सम्मन, कमली, दीपक, राधेश्याम, प्रताप आदि रहे।