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जिम्मेदर बेपरवाह, किसान हो रहे परेशान

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धनघटा तहसील भवन ।संवाद - फोटो : KHALILABAD
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जिम्मेदर बेपरवाह, किसान हो रहे परेशान
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वरासत, वसीयत और खारिज दाखिल में लेखपाल की गलती का नहीं हो पा रहा सुधार
संतकबीरनगर/धनघटा। राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली भी निराली है। वसीयत, वरासत, खारिज दाखिल में लेखपाल स्तर पर की गई छोटी गलती का सुधार कराना टेढ़ी खीर साबित हो रही है। धनघटा तहसील में 300 से अधिक ऐसे मामले हैं, जिसमें नाम व नंबर में हुई गलती का सुधार कराने के लिए किसान लेखपाल से लेकर एसडीएम कोर्ट तक का चक्कर लगा रहे हैं।
तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष लाल शरण सिंह बताते हैं कि लेखपाल के जरिए वरासत, वसीयत, खारिज दाखिल के काम की शुरुआत की जाती है। उसके बाद फाइल कानूनगो के माध्यम से तहसीलदार और एसडीएम तक पहुंचती है। लेखपाल के जरिए दर्ज किए गए नाम व नंबर पर अधिकारी स्वीकृति प्रदान कर देते हैं। उसके बाद वही नाम, नंबर कंप्यूटर में फीड होता है। बाद में खतौनी काश्तकार को मिलने लगती है।
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उन्होंने बताया खतौनी में हुई त्रुटि की जानकारी किसान को तब हो पाती है, जब फाइल पूरी हो जाती है। खतौनी में दर्ज नाम, नंबर और पता में यदि कोई त्रुटि है तो लेखपाल के माध्यम से तहसीलदार के पास जाकर धारा प क से ठीक हो जाती है, लेकिन तहसील में छोटी सी गलती का प्राथमिक स्तर पर सुधार कराने में लेखपाल रुचि नहीं लेते हैं। छह वर्ष से अधिक समय यदि व्यतीत हो जाता है तो फिर गलती सुधार के लिए तहसीलदार व एसडीएम कोर्ट में वाद दाखिल करना पड़ता है। एसडीएम कोर्ट में दायर इस तरह के मुकदमों की सुनवाई चार माह से नहीं की जा रही है।
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केस नंबर- एक
बंतवार गांव निवासी राम सिंह के पिता की मौत हो गई तो उनके नाम से वरासत हुई। वरासत में राम सिंह की जगह त्रुटि बस राम अशीष दर्ज हो गया। राम सिंह बताते हैं इसे सुधरवाने के लिए तीन वर्ष से लेखपाल के पास दौड़ लगा रहे हैं।
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केस नंबर- दो
मुंडेरा राय गांव के श्याम नारायण राय का कहना है कि उन्होंने अपनी भूमि आदर्श केंद्रीय विद्यालय मुंडेरा राय के नाम से की। लेखपाल की त्रुटि के कारण दो आराजी नंबर खतौनी में चढ़ नहीं सका। एसडीएम कोर्ट में मामला चल रहा है। सात वर्ष से अधिक समय हो गए, लेकिन खतौनी ठीक नहीं हो पाई
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केस नंबर - तीन
रामपुर निवासी संजय कुमार का कहना है कि उनकी खतौनी में आराजी नंबर 552 की जगह 522 दर्ज हो गया। सही नंबर दर्ज कराने के लिए तीन वर्षों से तहसील का चक्कर लगा हैं। त्रुटि सुधारने में जिम्मेदार रुचि नहीं ले रहे हैं।
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केस नंबर- चार
गायघाट गांव के रामचंद्र का कहना है कि एक वर्ष पहले उनके पिता की मृत्यु हो गई। वरासत में लेखपाल ने उनका नाम राम शंकर दर्ज कर दिया। अब तक नाम में सुधार नहीं हो सका है।
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कोट
लेखपालों को वसीयत, वरासत व खारिज दाखिल में सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। यदि प्राथमिक स्तर पर लेखपाल से कोई त्रुटि हो जाए तो संबंधित व्यक्ति को एसडीएम व तहसीलदार से मिलकर सुधार कराना चाहिए। चार माह से ऐसे मामलों की सुनवाई न किए जाने का आरोप बेबुनियाद है।
- डॉ. रवींद्र कुमार, एसडीएम धनघटा
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