संतकबीरनगर। जिले में साइबर अपराध पर नकेल कसने के लिए एसपी संदीप कुमार मीना ने थानों की साइबर सेल (साइबर हेल्प डेस्क) का पुर्नगठन किया है। कुल 41 पुलिस कर्मी संबंद्ध किए गए हैं। जो साइबर अपराध रोकने के साथ ही ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई कर पीड़ितों को राहत पहुंचाएंगे। उच्चाधिकारियों की ओर से इसकी रोजाना मॉनीटरिंग की जाएगी।
साइबर अपराध की रोकथाम के लिए फरवरी 2024 में पुलिस लाइन में थाना खुला। थाना के लिए भवन निर्माण का कार्य भी तेजी से चल रहा है। इससे पहले सभी एसपी के कैंप ऑफिस में साइबर सेल की व्यवस्था की गई थी। पांच लाख रुपये से ज्यादा साइबर धोखाधड़ी होने पर आईजी या समकक्ष अधिकारी के आदेश पर साइबर थाना से विवेचना होता था। सभी जिलों में साइबर थाना खुलने के आदेश के बाद उन्हें एसपी के अधीन कर दिया गया।
साथ ही सभी थाना पर साइबर सेल (साइबर हेल्प डेस्क) खोल दिया गया। यहां पर तैनात स्टाफ से ही अधिकतर कभी सामान्य बदलाव तो कभी जिले से बाहर ट्रांसफर कर दिए गए। इससे यह सेल बेमतलब साबित हो रहा था। इसकी वजह से ज्यादातर मामले साइबर थाना पर पहुंचने लगे। नये डीजीपी ने सभी जिलों में सुस्त हेल्प डेस्क को प्राथमिक मदद लायक तैयार करने का निर्देश एसपी को दिया।
एसपी ने थानों में तैनात 41 पुलिस कर्मियों को उन्ही के थानों की साइबर हेल्प डेस्क से संबद्ध कर दिया। उन्हें विशेषज्ञों की तरफ से साइट्रेन प्लेटफार्म व अन्य तकनीकी तरीके से प्रशिक्षित करने का काम किया जा रहा है। जिससे स्थानीय स्तर पर साइबर अपराध के शिकार पीड़ित को त्वरित सहायता प्रदान किया जा सके।
साइबर फ्राड का शिकार व्यक्ति अपने थाने पर बैठकर करा सकेगा रकम फ्रीज
अधिकारियों के मुताबिक हर थाना पर चार से पांच पुलिस कर्मी संबद्ध किए गए हैं। इनमें इंस्पेक्टर, एसआई, दीवान, दो सिपाही व महिला कांस्टेबल शामिल हैं। बड़े मामलों में केस दर्जकर संबंधित थाना के इंस्पेक्टर क्राइम विवेचना करेंगे। साइबर क्राइम थाना के प्रभारी इंस्पेक्टर जेपी चौबे ने बताया कि अब तक साइबर हेल्प डेस्क के कर्मचारी पीड़ित को 1930 नंबर लगाने के लिए कहते थे। प्रशिक्षण के बाद वह अपने थाना से ही बैंक खातों से रकम फ्रीज व नंबर लाक करा सकेंगे।