संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। सरयू के बाढ़ से धनघटा तहसील क्षेत्र के 18 गांव अब धीरे-धीरे खाली हो चुके हैं। पानी हट जाने के बाद लोगों की दिनचर्या सामान्य होती जा रही है लेकिन बाढ़ के जरिये छोड़ी गई तमाम तरह की समस्याएं पीड़ितों के सामने खड़ी हो गई हैं।
प्रतिवर्ष सरयू की बाढ़ का दंश झेलने वाले गांव गायघाट दक्षिणी, चकदहा, गुनवतिया, सियर कला, दौलतपुर, ढोल बजा, गुनवतिया, साधु की कुटी, सियाराम अधीन सिंह, कटहा खैरगाड, खरगपुर, सरैया, करनपुर, भौवापार, खरैया समेत 18 गांव इस वर्ष दो बार आई बाढ़ के चपेट में आ गए। बाढ़ पीड़ित शिवपूजन, रामानंद, जयकुमार का कहना है कि पहली बार आई बाढ़ से नुकसान तो कम हुआ था लेकिन दूसरी बार आई बाढ़ में सब कुछ बर्बाद हो गया। खेत में जो हरा चारा था वह भी नष्ट हो गया। साथ ही साथ धान की फसल भी बर्बाद हो गई।
घर में रखा भूसा, अनाज सड़ गया। भूसा न तो पशुओं को खिलाने लायक बचा है और अनाज खाने लायक रह गया है। पशुओं का सहारा इस समय एमबीडी बांध बना है। जहां पशुओं को चराकर किसी तरह काम चलाया जा रहा है लेकिन लोगों के भोजन का इंतजाम कैसे हो यह समझ में नहीं आ रहा है।
गांव वालों का कहना है कि पिछले वर्षों में थोड़ी सी बाढ़ आती थी तो सरकार राहत सामग्री वितरित कर देती थी लेकिन इस वर्ष आई बाढ़ से सब कुछ बर्बाद हो गया। इसके बावजूद राहत सामग्री का वितरण नहीं किया गया।
मंडलायुक्त ने भूसा वितरण के निर्देश दिए थे लेकिन हैंडपंप अभी तक वितरण नहीं किया गया। कुल मिलाकर दियारा क्षेत्र के लोगों की दिन चर्या प्रभावित हुई है।