संतकबीरनगर। सीएमओ के निर्देश पर स्वास्थ्य भाग की टीम ने बृहस्पतिवार को पंजीकृत अस्पतालों का अभिलेखों के साथ निरीक्षण किया। इस दौरान जिन चिकित्सकों के नाम से अस्पतालों का पंजीकरण किया गया था वे मौके पर मौजूद नहीं मिले।
इतना ही नहीं इन नर्सिंग होम पर मरीजों का अप्रशिक्षित कर्मियों द्वारा उपचार किया जा रहा था। इस मामले को लेकर टीम ने इन चार अस्पतालों का पंजीकरण निरस्त कर दिया। वही दो नर्सिंग होम की आयुष्मान संबद्धता भी समाप्त कर दी। जिले में संचालित पंजीकृत अस्पतालों पर डाक्टरों की उपस्थिति के सत्यापन के लिए एसीएमओ डाॅ. राम रतन, डाॅ. शैलेंद्र कुमार सिंह, डाॅ. मुबारक अली, राजेंद्र कुमार व शशिभूषण वर्मा के साथ टीम सबसे पहले अवध हॉस्पिटल पर पहुंची।
वहां पर एक मरीज भर्ती मिला। जब संचालक से जिस डाक्टर के नाम से अस्पताल का पंजीकरण किया गया था उसके बारे में जानकारी ली गई तो वे मौके पर मौजूद नहीं मिले। उन्होंने बताया गया कि वे बाहर गए हैं अभी आ जाएंगे। मेंदावल बाईपास के पास स्थित स्टार हॉस्पिटल के संचालक कमरूल अफाक ने टीम को बताया कि अस्पताल में छह मरीजों का ऑपरेशन किया गया है। जिसमें शाह आलम, आकवरुननिशा, सरिता पाल, हाजिरा के पित्त की थैली का ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक के बारे में पूछने पर संचालक संतोष जनक उत्तर नहीं दे पाया। जब कि इस अस्पताल का पंजीकरण डॉ. आरएस श्रीवास्तव की डिग्री पर किया गया था। यह अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के तहत भी पंजीकृत है।
इसके बाद टीम मेंहदावल बाईपास स्थित बालाजी हॉस्पिटल पर पहुंची, यहां पर न तो डाक्टर मिले न ही कोई मरीज। पुरानी सब्जी मंडी स्थित अनामिका हॉस्पिटल पर भी डाॅक्टर मौजूद नहीं मिले। इन हॉस्पिटल का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया। वहीं संस हास्पिटल व बालाजी हॉस्पिटल हैंसर बाजार का आयुष्मान योजना के तहत किए गए पंजीकरण को भी निरस्त किया गया। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से अस्पताल संचालकों में खलबली मच गई है।