संतकबीरनगर। जिले की दोनों प्रमुख नदियों सरयू और राप्ती का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। स्थिति यह है की सरयू जहां 12 मिली मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही है, वहीं राप्ती 20 मिलीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही है। राप्ती जहां खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर नीचे है वहीं सरयू 40 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। नदियों के बढ़ते जलस्तर के चलते नदी के तटवर्ती गांवों में लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं।
जिले की दोनों प्रमुख नदियों राप्ती और सरयू के का जलस्तर जहां शुक्रवार को स्थिर था, वहीं रात में दोनों ही नदियों के जलस्तर में वृद्धि देखी गई। राप्ती नदी वर्तमान समय में खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। इसके चलते मेंहदावल के कछार क्षेत्र के गांवों में संकट बढ़ा है। जोरवा, डुमरिया बाबू, करमैनी, ठाठर के साथ ही अन्य स्थानों पर पानी बांधों पर दबाव बना रहा है। इसके चलते करमैनी बेलौली बंध पर स्थित 19 गांवों के लोगों में इस बात को लेकर संकट दिख रहा है कि बांधों पर पानी के दबाव के चलते रिसाव हो सकता है। वहीं राप्ती नदी का इस साल का यह सबसे अधिक जलस्तर है। डुमरिया बाबू के अवधेश कहते हैं कि नदी का जलस्तर इसी तरह से बढ़ता रहा तो यह खतरे के निशान को पार कर जाएगी।
सरयू नदी का जलस्तर भी इस समय तेजी से बढ़ा है। जलस्तर बढ़ने के कारण नदी का पानी बांधों के करीब पहुंच गया है। स्थिति यह है कि तुर्कवलिया नायक में बने हुए ठोकर पर भी दबाव बढ़ा है। हालांकि इस बंधे पर बोल्डर पिचिंग के साथ ही परक्यूपाइन भी लगाए गए हैं, लेकिन पानी बंधे तक पहुंच गया है। बंधे में रिसाव होने पर इसके कटने की भी संभावना बनी हुई है। ढोलबजवा के हरीराम बताते हैं कि जलस्तर बढ़ने और घटने से नदी कटान भी कर रही है। कटान कर रही नदी का बांध अगर टूटता है तो गांव में पानी भर जाएगा। वहीं बंधे पर पेट्रोलिंग भी लगातार की जा रही है। बांध की स्थिति पर अधिकारी नजर रखे हुए हैं।
सरयू की धारा में समा रहे खेत, रास्ते हो रहे हैं जलमग्न
धनघटा क्षेत्र में सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। स्थिति यह है कि सरयू की धारा में कटकर किसानों के खेत समा रहे हैं। वहीं जलस्तर बढ़ने के चलते गांवों के संपर्क मार्ग जलमग्न हो रहे हैं।
पौली ब्लॉक क्षेत्र के दक्षिण पश्चिमी सीमा पर स्थित ग्राम पंचायत पड़रिया गांव की धारा इस तरह कटान तेज कर रही वहीं पड़रिया गांव के दक्षिण घाघरा नदी में खेत समा जा रहे हैं। ग्रामीण जीतन, राम चरन, पंचराम, राजेंद्र, सीताराम, जगदीश, रामकरन, रामचंद्र, राजेंद्र, सत्य प्रकाश, दयाराम, दीनानाथ, जेठू निषाद आदि ने बताया कि नदी धीरे-धीरे बंधे की तरफ आ रही है और कटान का खतरा बढ़ रहा है।
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चार किसानों की 20 बीघा गन्ना नदी में समाया
पड़रिया गांव के निवासी पंचराम, राजेंद्र, रामचरण, जितेंद्र ने बताया कि सरयू के माझा क्षेत्र में लगभग 25 बीघा गन्ना की खेती की थी। लगभग 20 बीघा गन्ना की फसल डूब गई है। सारा गन्ने का खेत घाघरा नदी में विलीन हो गया। ऐसी स्थिति में गन्ने को काटकर कच्चे ही पशुओं को खिलाना पड़ रहा है।
कोट
जिले की नदियों के जलस्तर पर लगातार निगाह रखी जा रही है। टीमें पूरी सतर्कता के साथ काम कर रही हैं। बांधों पर लगातार पेट्रोलिंग की जा रही है। कहीं भी इस प्रकार की स्थिति नहीं है कि बंधे कटें। बांधों पर पूरी मजबूती के साथ काम हुआ है। वहीं बाढ़ से बचाव के लिए आवश्यक इंतजाम पहले से ही कर लिए गए हैं।
-आलोक कुमार, जिलाधिकारी