राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों की हुई थी गिरफ्तारी
तारेश सिंह
मेंहदावल। 18 अक्तूबर 1990 की रात थी। राम मंदिर से जुड़े आंदोलन में सम्मिलित होने वाले सक्रिय लोगों की गिरफ्तारी मुलायम सरकार के इशारे पर की जा रही थी। विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल समेत सभी अनुषांगिक संगठन के लोग राम मंदिर आंदोलन को धार दे चुके थे। गांव-गांव राम ज्योति पहुंच रही थी।
लोग कार सेवा के लिए अयोध्या जाने की तैयारी में थे, ऐसे में लोगों की गिरफ्तारियां शुरू हो गईं। उसके बाद भी राम भक्तों के हौसले बुलंद थे और वे आंदोलन को नित्य-प्रतिदिन धार देने में जुटे थे। इससे मेंहदावल क्षेत्र अछूता नहीं था।
संत बाबा सुग्रीव दास जी बताते हैं कि 18 अक्तूबर 1990 को आधी रात को पुलिस ने हमे नींद से उठाया और अपने साथ ले गई। उस समय बजरंग दल का पदाधिकारी था। राम मंदिर आंदोलन से जुड़ा होने के कारण तथा 30 अक्तूबर को अयोध्या में कार सेवा के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर तैयारी चल रही थी। पुलिस पकड़कर थाने लाई और सुबह हमें बस्ती के सेक्सरिया इंटर कॉलेज पहुंचाया दिया गया। वहां से देवरिया जेल भेजा गया। जब जेल में हम राम भक्तों ने प्रवेश किया तो पहले से जेल में रखे गए राम भक्तों के साथ जमकर नारेबाजी की गई। जय श्री राम के नारों से जेल गूंज उठी। बच्चा-बच्चा राम का जन्म भूमि के काम का नारा बुलंद होता रहा।
वहीं, कस्बे के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा विश्व हिंदू परिषद से जुड़े नंदलाल ने बताया कि हमारी गिरफ्तारी हुई तो हम पुलिस जीप से कूद कर फरार हो गए। बजरंग दल के पदाधिकारी राम प्रसाद आर्य के साथ हम लोग यहां के राम भक्तों से मिलने देवरिया जिला जेल पहुंचे। वहां लोगों से मुलाकात के बाद पुलिस से बचते-बचाते वापस अपने क्षेत्र में पहुंचे और अयोध्या की प्रस्तावित कार सेवा में भाग लेने के लिए तैयारी करने लगे। संगठन के आह्वान पर हम लोग कस्बे में जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन शुरू किए और हम लोगों की गिरफ्तारी हुई। सेक्सरिया इंटर कॉलेज बस्ती की अस्थायी जेल में हमें रखा गया।
55 वर्षीय गुलाब चंद्र पटवा ने बताया कि विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा भाजपा से जुड़े कई प्रमुख नेताओं की मेंहदावल पुलिस ने गिरफ्तारी कर जेल में बंद कर दिया था। लेकिन राम भक्तों के हौसले मुलायम सरकार के ज़ुल्म तथा पुलिस प्रशासन के गिरफ्तारी के बाद भी नहीं टूटे।
55 वर्षीय परमानंद मोदनवाल ने बताया कि पुलिस ने हमें घर से गिरफ्तार किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा होने के कारण हमें राम मंदिर आंदोलन को लेकर हिरासत में लिया गया। थाने में लाने के बाद कुछ पुलिसकर्मियों ने हम राम भक्तों से दुर्व्यवहार भी किया, लेकिन हम राम भक्त परिसर में भूमि पर बैठकर जय श्री राम के नारे के साथ ही भजन-कीर्तन करते रहे। हम लोगों की गिरफ्तारी की बात सुनकर जब थाने पर भीड़ जुटने लगी। तब पुलिसकर्मियों ने हिरासत में लिए गए हम लोगों को एक वाहन में भरकर बस्ती में बनाई गई अस्थायी जेल में कैद कर दिया। उस समय क्षेत्र के तमाम लोग उस जेल में रखे गए थे। आज रामलाल की प्राण प्रतिष्ठा व मंदिर निर्माण शुरू होने पर हमें खुद के राम भक्त होने पर गर्व है।