धर्मसिंहवा। सेवहां चौबे गांव में चल रहे शतचंडी महायज्ञ के सातवें दिन कथा व्यास गौरव कृष्ण शास्त्री ने कहा कि रामायण मर्यादा में रहना और उत्तम आचरण की सीख देता है, हमारे सनातन धर्म के सारे संस्कार रामायण से मिले हुए हैं।
कथा व्यास ने कहा कि भगवान राम पुरुषों में उत्तम अपने मर्यादा पूर्ण जीवन को लेकर के माने गए हैं पिता के एक वचन को निभाने के लिए बिना किसी वाद विवाद के 14 वर्ष के लिए वन चले गए यहां तक की भरत संदेश ले गए कि पिता की मृत्यु हो गई है और आप चलिए अयोध्या का सिंहासन आपका इंतजार कर रहा है वे पिता के वचन को निभाने के लिए 14 वर्ष पूर्ण करने के बाद ही अयोध्या में आते हैं। भगवान राम के पाणिग्रहण संस्कार को सनातन धर्म के लिए आज भी अनूकरणीय है।
कथा व्यास ने कहा कि मानव समाज को रामचरितमानस का निरंतर पाठ करना चाहिए जीवन में भटकाव की स्थिति पर यह हमें रास्ता दिखाता है।