मंच की पृष्ठभूमि ही नहीं पंडाल की रंगत में भी भगवा छाया हुआ था। मंचासीन नेताओं से लेकर दर्शक दीर्घा में मौजूद कार्यकर्ताओं के गले में मौजूद आईकार्ड के रिबन की आभा भी केसरिया थी। पहनावे और माहौल से गहराए रंग ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से रू-ब-रू हो रहे कार्यकर्ताओं में जब-जब जोश भरा तो उसकी प्रतिक्रिया नारों की शक्ल में बाहर आई, जिनमें रह-रह कर राम के नाम की गूंज भी सुनाई दे रही थी। अलबत्ता समारोह में मौजूद भाजपा के शीर्ष नेताओं ने राष्ट्र और प्रांत के मुद्दों पर बात की लेकिन राम या मंदिर का जिक्र किसी के संबोधन में नहीं आया।
भाजपा के बूथ अध्यक्षों के सम्मेलन में शिरकत के दौरान पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने जहां कांग्रेस की पूर्ववर्ती हुकूमत के दोष और मोदी सरकार की खूबियों के हवाले से कांग्रेस मुक्त भारत के बाद सपा-बसपा मुक्त प्रदेश का आह्वान किया, वहीं गोरक्ष प्रांत की 62 विधानसभा सीटों में से अधिकतम सीटों पर भाजपा की जीत का आह्वान भी। गोरखपुर के सांसद महंत आदित्यनाथ की खूबियां दिल से गिनाईं तो आदित्यनाथ ने सूबे की कानून व्यवस्था के हवाले से सपा सरकार को निशाने पर रखा। प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य ने बूथ अध्यक्षों से कहा कि साइकिल (सपा) को खंड-खंड कर दो जिससे दोबारा चलने के लायक न रहे और सीएम का परिवार सैफई वापस हो जाए।
बस्ती के सांसद हरीश द्विवेदी ने कहा कि जिला मनरेगा घोटाले के बाद बाढ़ घोटाले की चपेट में है। प्रदेश सरकार के एक मंत्री के इशारे पर पुलिस के चलने से कानून व्यवस्था ठप है। डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल ने भी सपा पर निशान साध यूपी में भ्रष्टाचार और गुंडाराज बताया। अन्य वक्ताओं के एजेंडे में भी यूपी सरकार की कमियां थी।
भविष्य में भाजपा की सरकार के सहारे यूपी में विकास और अमन की उम्मीदें जगाई गईं लेकिन यूपी के ज्वलंत मुद्दे राम मंदिर का जिक्र किसी की जुबान पर नहीं आया। राम का नाम सुनने और यूपी में भाजपा से सीएम के संभावित चेहरे का अक्स जानने की आस से पंडाल तक पहुंचे कई कार्यकर्ताओं ने आयोजन बाद यही कहा...अब तो राम मंदिर को राम-राम।