राम जन्म भूमि आंदोलन की कहानी, कारसेवकों की जुबानी
हरिहरपुर। 22 जनवरी को अयोध्या धाम में बने भव्य मंदिर में रामलला विराजमान होंगे। यह दिन जीवन का अविस्मरणीय दिन होगा। राम जन्मभूमि आंदोलन की यादें साझा करते हुए कारसेवकों ने बताया कि कैसे मुलायम सिंह यादव की सरकार में उन्हें जेल में निरुद्ध कर प्रताड़ित किया गया था। कारसेवा में जाने वाले भाजपा और संबंधित संगठनों पर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा था। हर रात पुलिस घर पहुंचकर गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही थी। इसके चलते डेढ़ महीने पहले ही घर छोड़ना पड़ा था। गिरफ्तारी के बाद कुल तीन माह बीत गए, तब परिवार से मिले। संवाद
पिता की नसीहत पर दरोगा ने बरती नरमी
हरिहरपुर। बात अक्तूबर 1990 की है। उस दौरान प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी। पुलिस कार सेवकों को ढूंढ-ढूंढकर गिरफ्तार कर रही थी। कार सेवा के लिए अयोध्या पहुंचने की जिद के चलते हम एक महीने पहले ही अपना घर छोड़ दिए थे। लोगों को कारसेवा में जाने के लिए संगठित करने का कार्य चल ही रहा था। लेकिन मुखबिरी के चलते हरिहरपुर के सिद्धेश्वरनाथ मंदिर पर पुलिस ने हम लोगों को गिरफ्तार कर लिया। महुली में तैनात रहे एक दरोगा के पिता भी उस दौरान उसी गाड़ी में बैठे थे, जिसमें हमें बैठाया गया था। दरोगा की सख्ती से नाराज उनके पिता की नसीहत के चलते पुलिस ने कारसेवकों से नरमी बरती। पुलिस उन्हें लेकर कारसेवकों के लिए बनाए जेल पहुंची तो वहां जगह नहीं मिली। पुलिस कार सेवकों को लेकर भटकती रही लेकिन कहीं जेल में जगह ही नहीं बची थी। आखिरकार पुलिस ने उन्हें देवरिया जेल पहुंचाया। जहां डेढ़ महीने वे निरुद्ध रहे। तब मोबाइल फोन का जमाना नहीं था। परिवार में बुजुर्ग माता-पिता और बच्चों की भी फिक्र हो रही थी। लेकिन राम काज के आगे कुछ नहीं दिख रहा था। आज राम मंदिर का निर्माण कार्य पूरा होने से मन बहुत खुश है।
- सुभाष त्रिपाठी, हरिहरपुर
कारसेवकों को यातनाएं भी भोगनी पड़़ी थीं
हरिहरपुर। राम जन्मभूमि आंदोलन में करीब डेढ़ माह देवरिया और गोरखपुर की जेल में बिताए थे। उस दौरान पुलिस कार सेवकों पर जुल्म भी कर रही थी। गोरखपुर की जेल में उस समय मेरे साथ कोलकाता के रहने वाले शहीद कोठारी बंधुओं के साथी प्रदीप गुप्ता भी थे। जब उन्होंने कोठारी बंधुओं की शहादत की खबर सुनी तो दहाड़ें मारकर रोने लगे। उन्होंने कहा कि यदि आज पुलिस हमें गिरफ्तार न की होती तो हम भी प्रभु श्रीराम की शरण में सद्गति को प्राप्त हुए होते। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी पर अफसोस जाहिर करते हुए खुद को अभागा बताया। वह दिन 33 साल बाद भी हम नहीं भूले हैं। आज जब रामलला का मंदिर बनकर तैयार है तो मन में अपार खुशी है। अब अयोध्या जाकर प्रभु के दर्शन जरूर करेंगे।
- विजय शुक्ल, हरिहरपुर
प्रभु श्रीराम का मंदिर बनने से मन को सुकून मिला
हरिहरपुर। प्रभु श्रीराम का मंदिर बनने की खबर से मन को बहुत सुकून मिला है। आज हमने जो डेढ़ महीने जेल में गुजारे थे, उसकी भरपाई भाजपा की सरकार ने कर दी।जन्मभूमि आंदोलन में पुलिस हम लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उस समय पुलिसिया आतंक चरम पर था। लोग कारसेवा के लिए अयोध्या जाने को टोलियॉ बनाकर निकल रहे थे। हम लोग भी पुलिस से छिपते हुए कारसेवा के लिए जाने को आतुर थे। लेकिन पुलिस की गिरफ्त में आ गए। उस समय हम लोगों के साथ पूर्व चेयरमैन स्वर्गीय बनवारी लाल भी थे। उस समय पुलिसिया आतंक की कहानी ब्रिटिश हुकूमत को भी मात दे रही थी। लेकिन कारसेवकों का हौसला डिगा न सकी।
- गंगा पटवा, हरिहरपुर