धनघटा मं अधिवक्ता दिवस मनाते अधिवक्ता-संवाद
धनघटा। धनघटा तहसील परिसर में बुधवार को अधिवक्ताओं ने प्रथम राष्ट्रपति बाबू राजेंद्र प्रसाद की जयंती अधिवक्ता दिवस के रूप में मनाई। तहसील बार एसोसिएशन के पूर्व तहसील अध्यक्ष लाल शरण सिंह ने कहा कि बाबू राजेन्द्र प्रसाद एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, वकील, विद्वान और तत्पश्चात, 1950 से 1962 तक भारत के प्रथम राष्ट्रपति रहे। वे एक भारतीय राजनीतिक नेता और पेशे से वकील थे। प्रसाद भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए और बिहार क्षेत्र के एक प्रमुख नेता बन गए। महात्मा गांधी के समर्थक, प्रसाद को 1931 के नमक सत्याग्रह और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ब्रिटिश अधिकारियों ने कैद कर लिया था। उनके जीवन से नई पीढ़ी को सीख लेनी चाहिए। तहसील अध्यक्ष हनुमान प्रसाद चौधरी ने बाबू राजेन्द्र प्रसाद के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1950 में जब भारत गणतंत्र बना, तो संविधान सभा ने प्रसाद को इसका पहला अध्यक्ष चुना। अध्यक्ष के रूप में, प्रसाद ने पदाधिकारियों के लिए निष्पक्षता और स्वतंत्रता की परंपरा स्थापित की और कांग्रेस पार्टी की राजनीति से संन्यास ले लिया। औपचारिक राष्ट्राध्यक्ष होने के बावजूद, प्रसाद ने भारत में शिक्षा के विकास को प्रोत्साहित किया और कई अवसरों पर नेहरू सरकार को सलाह दी।
दिलीप राय ने कहा कि राजेन्द्र प्रसाद ने 1906 में बिहारी छात्र सम्मेलन के गठन में प्रमुख भूमिका निभाई। इस अवसर पर प्रेम नारायण मिश्रा, सुरेंद्र प्रताप सिंह, प्रभुनाथ यादव, त्रिपुरारी पांडेय, योगेश कुमार श्रीवास्तव, श्रवण कुमार चौहान, गंगाराम प्रजापति, उपेंद्र त्रिपाठी, चंदन, वीरेंद्र त्रिपाठी आदि मौजूद थे।