संतकबीरनगर। आतिशबाजी के बाद बढ़े प्रदूषण की वजह से आंखों में जलन, लालिमा, पानी आना, कंकड़ जैसी चुभन के मरीज बढ़े हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कई लोग बिना चिकित्सक की सलाह के केमिस्ट से ड्राप लेकर आंखों में डाल रहे हैं। लंबे समय तक ड्रॉप डालने की वजह से कम उम्र में मोतियाबिंद के शिकार हो सकते हैं। ऐसे मे बिना चिकित्सक की सलाह के इस तरह के ड्राप न डालें। दीपावली पर लोगों ने जमकर पटाखे फोड़े। इस कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक भी बढ़ गया। इससे न सिर्फ सांस रोगियों का दम फूल गया, बल्कि आंखों में जलन की भी समस्या बढ़ गई। सीएचसी खलीलाबाद के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. केपी सिंह ने बताया कि पटाखों से कार्बनडाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड गैस निकलती है, जो हवा में बनी रहती है। जब ये गैस आंखों के संपर्क में आती है तो समस्या पैदा करती है। आंखों में लालिमा, खुजली, जलन, पानी आना, चुभन आदि शुरू हो जाती है।
डॉ. केपी सिंह ने बताया कि इस समस्या के प्रतिदिन 15 से 20 मरीज आ रहे हैं। इसलिए लोगों को इलाज भी विशेषज्ञ से ही कराना चाहिए। बिना चिकित्सक के कोई भी ड्राप आंखों में नहीं डालना चाहिए।