मेंहदावल। परिषदीय विद्यालयों में होने वाली हर महीने की पीटीएम की बैठक अब तीन महीने में होगी। कांवेंट की तर्ज पर सरकारी स्कूल में अभिभावकों की अहम भूमिका होगी। बच्चों को तैयार करके विद्यालय भेज देने भर से ही अभिभावकों की जिम्मेदारी नहीं पूरी होगी, बल्कि बेहतर नागरिक बनाने के लिए घर पर शिक्षा के लिए उपयुक्त माहौल तैयार करने से लेकर पढ़ाई के लिए प्रेरित करने का दायित्व भी रहेगा। जिससे सभी बच्चे भविष्य के लिए स्वयं तैयार कर सकें।
बीईओ आशीष कुमार सिंह ने बताया कि कांवेंट स्कूलों की तर्ज पर बेसिक शिक्षा विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ाई की गुणवत्ता में अधिक सुधार व शिक्षकों को और ज्यादा जवाबदेह बनाने के लिए अभिभावकों भी भूमिका तय की है। इसके लिए हर तिमाही पर होने वाली अभिभावक शिक्षक बैठक का दायरा बढ़ाया जा रहा है। पहले हर महीने होने वाली बैठक खानापूरी तक सीमित रहती थी व गिने चुने अभिभावक ही बैठकों में पहुंचते थे। हर तीन माह पर होने वाली प्रत्येक बैठक की अलग थीम निर्धारित की गई है। इस बार सब पढ़े सब बढ़े, अक्तूबर में आज की उपस्थिति कल की प्रगति, दिसंबर में शिक्षा का सफर परिवार के संग, फरवरी महीने में मेरा विद्यालय मेरी जिम्मेदारी थीम पर बैठकों का आयोजन होगा। इसमें हर बार की तरह मनमानी न हो, इसलिए प्रेरणा पोर्टल के जरिए ऑनलाइन मानीटरिंग होंगी। बैठक में अब इनकी शत प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ ही बच्चों की पढ़ाई में सुधार की जिम्मेदारी दी जाएगी।
अभिभावकपढ़ाई का बनाएंगे माहौल
अभिभावक घर पर पढ़ाई के लिए माहौल बनाने व बच्चों के सामाजिक व्यवहार के शैक्षिक गतिविधियों पर ध्यान देंगे। बैठकों में बच्चोंं में अनुशासन, स्वच्छता, जीवन कौशल, पर चर्चा होगी। विद्यालय न आने के कारण पूछे जाएंगे। अभिभावकों को बताया जाएगा कि किस तरह वह बच्चों के साथ समय बिताएं। उन्हें दिए गए अभ्यास को पूरा करने के लिए प्रेरित करें। शिक्षक अभिभावक को हर तीन माह पर फीडबैक देंगे। वहीं अभिभावक भी बच्चों की शैक्षिक प्रगति का मूल्यांकन करने के साथ ही विद्यालय के वातावरण, शिक्षकों के व्यवहार, भवन में कायाकल्प के सभी 19 पैरामीटर के आधार पर कमियां व उनमें सुधार के लिए सुझाव देंगे।
सभी बच्चों के अभिभावकों भेजे जाएंगे निमंत्रण
पीटीएम बैठक में अभिभावकों को आमंत्रित करने के लिए शिक्षक व बच्चे निमंत्रण कार्ड बनाएंगे। बच्चों की कपियों में लिखित संदेश दिया जाएगा। शिक्षक लगातार अनुपस्थित बच्चे व कम उपस्थिति वाले बच्चों की सूची तैयार करेंगे। जो अभिभावक पूर्व की बैठकोंं में नहीं आते थे उनके वाट्सएप पर संदेश देंगे। उनको फोन करेंगे, उनके घर पर जाकर संपर्क करेंगे। इन बैठकों में बीएसए से लेकर एआरपी व जिला समन्वयक भी पहुंचेंगे।