संतकबीरनगर। अगर पिता अथवा माता की मौत हो गई तो इस स्थिति में भी वारिस को राजस्व अभिलेख में पैतृक संपत्ति (भूमि, मकान आदि) पर नाम दर्ज कराने के लिए चढ़ावा देना पड़ता है। अगर चढ़ावा नहीं दिया तो नियमानुसार ऑनलाइन आवेदन करने के बाद भी तहसील के चक्कर काटते रह जाएंगे, लेकिन आपका नाम कागजों में नहीं चढ़ेगा।
जिले की खलीलाबाद तहसील में 13, धनघटा तहसील में 17 और मेंहदावल तहसील में 16 मामले वरासत के लंबित हैं, जबकि खलीलाबाद में 4, धनघटा और मेंहदावल में 9-9 मामले वरासत के निर्धारित समय सीमा सात दिन के अंदर निस्तारित नहीं होने की वजह से टाइमबार्ड हो गया है। ऐसे में देखा जाए तो तीनों तहसीलों में 46 से अधिक मामले हैं, जिनमें आवेदक वरासत कराने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के बाद राजस्व कर्मियों के पास दौड़ लगा रहे हैं।
पहले नियम था कि अगर किसी की मृत्यु हो जाती थी, तो उसकी तेरहवीं के दिन ही संबंधित क्षेत्र का लेखपाल वरासत कर मृतक के वारिसों को खतौनी उपलब्ध कराता था। वर्ष 2004 में राजस्व अभिलेखों के कंप्यूटराइज्ड प्रक्रिया के तहत खतौनी भी कंप्यूटराइज्ड हो गई है। इसके बाद भी मृतक के वरासत का दायित्व संबंधित लेखपाल पर ही था। इस बीच कई ऐसे मामले रहे, जहां संबंधित क्षेत्र के राजस्व कर्मियों की लापरवाही वरासत के कई मामले आठ से दस सालों तक लंबित रहे। दो वर्ष पूर्व वरासत के लिए शुरू हुई ऑनलाइन आवेदन करने की प्रक्रिया पारदर्शी तो है, लेकिन जटिल हो गई है। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद भी अगर आवेदनकर्ता ने चढ़ावा नहीं दिया तो वरासत प्रक्रिया कागजों में उलझी रहेगी और आवदेनकर्ता को तहसील के चक्कर लगाते रहना पड़ेगा।
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ऐसे होता है खेल
वरासत के ऑनलाइन आवेदन के निस्तारण के लिए 21 दिन का समय होता है, लेकिन कई ऐसे मामले हैं जो छह महीने अथवा एक साल से अधिक समय से लंबित हैं। इसमें मृतक के निधन की तिथि के लिए मृतक प्रमाणपत्र और वारिस तय करने के लिए परिवार रजिस्टर की नकल की मांग की जाती है। इसके साथ ही आवेदक से आधार कार्ड की छाया प्रति मांगी जाती है। इन अभिलेखों में कमिया दिखाते हुए अथवा अधिकारियों की असहमति बताते हुए आवेदक को कई बार दौड़ाया जाता है। फिर चढ़ावा मिलने पर वरासत कर दी जाती है। चढ़ावा नहीं मिला तो आवेदक को तहसील का चक्कर लगाना पड़ेगा।
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वरासत दर्ज होने की यह है प्रक्रिया
किसी की मृत्यु होती है तो भूमि, मकान संबंधी राजस्व अभिलेख में उसके वारिस (पत्नी, पुत्र व अविवाहित पुत्री) का नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज होता है। इसके लिए वारिस को मृत्यु प्रमाणपत्र एवं परिवार रजिस्टर की नकल संलग्न कर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके बाद यह आवेदन लेखपाल के पास आता है। आवेदक को आवेदन की प्रति एवं साक्ष्य लेखपाल को देना होता है, जिसकी जांचकर रिपोर्ट लेखपाल राजस्व निरोधक को भेजता है। राजस्व निरीक्षक इस पर मृतक के स्थान पर उसके वारिस को वरासत करने का आदेश देता है, जिसके बाद संबंधित भूमि राजस्व अभिलेख (खतौनी) में वारिस का नाम दर्ज हो जाता है। अलग-अलग राजस्व ग्रामों में भू-संपत्ति की वरासत के लिए प्रत्येक राजस्व ग्राम का अलग-अलग आवेदन करना होता है।
पति सच्चिदानंद सिंह की मौत आठ वर्ष पहले हो गई। उनके नाम की जमीन जायदाद का वरासत पत्नी बिंदु सिंह व बेटा मंटू सिंह और भोलू सिंह के नाम से होना है। पति की मौत के बाद लेखपाल से वरासत करने के लिए संपर्क किया गया। उन्होंने बताया कि छह गांव में उनके नाम की जमीन है। 3000 रुपये खर्च लगेगा, उसके बाद वरासत हो जाएगी। बिंदु सिंह का कहना है 1500 रुपये लेखपाल को दे दिए, लेकिन उसने वरासत नहीं की। इसके लिए तहसील में भागदौड़ बराबर करना पड़ रही है।
बिंदू सिंह, औराडाड़ गांव निवासी, तहसील धनघटा
पिता रामसुमेर की मौत हुए 12 वर्ष का समय गुजर गया। पिता के नाम से पांच बीघा खेती है, जिसका वरासत करने के लिए लेखपाल से संपर्क किया। उन्हें खर्च के नाम पर 700 रुपये भी दिए, लेकिन वरासत आज तक नहीं हो सकी। इसी बीच लेखपाल का तबादला हो गया। उनके स्थान पर आए लेखपाल वरासत करने के लिए 1000 रुपये की मांग कर रहे हैं। इसकी शिकायत पिछले महीने संपूर्ण समाधान दिवस में की, लेकिन वरासत नहीं हो पा रही है।
-रामजीत, रामपुर गांव निवासी, धनघटा
पिता की मृत्यु करीब डेढ़ महीने पहले हुई। लेखपाल को कागजात दे चुके हैं, लेकिन वरासत वारिसों के नाम नहीं हो पा रही है। आए दिन तहसील का चक्कर काटना पड़ रहा है।
-इंद्रपाल, निवासी नंदौर, मेंहदावल
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परिवार के विजय कुमार और बजरंगी राय की कोरोना की पहली लहर में मौत हो गई थी। मृतक के आश्रितों की वरासत अभी तक नहीं हो पाई। इस बीच लेखपाल भी बदल गए। वरासत की प्रक्रिया में नियमों का पालन और समय बद्धता का विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
-अधिवक्ता विनीत राय, उतरावल, तहसील खलीलाबाद
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वरासत संबंधी मामलों को लंबित रखना लापरवाही है, इसका समयबद्ध त्वरित निस्तारण होना चाहिए। लंबित मामलों की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
-संदीप कुमार, डीएम