संतकबीरनगर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिम्मेदार अधिकारी कमरों में बैठना छोड़कर क्षेत्र में जाएं और स्वास्थ्य सेवाओें को बेहतर बनाने का प्रयास करें। जिले के लिए सबसे बड़ी शर्मनाक बात है कि किसी डॉक्टर के चेम्बर में कोई प्राइवेट आदमी बैठ कर दवा लिखें। ये बातें डीएम सुरेश कुमार ने शुक्रवार को कहीं।मौका था कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति बैठक का।
डीएम ने कहा कि अस्पतालों में तैनात डॉक्टर प्राइवेट अस्पतालों में प्रेक्टिस करना बंद कर दें अन्यथा उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसी परिप्रेक्ष्य में मेहदावल में संविदा के आधार पर नियुक्त महिला डॉक्टर की संतोषजनक सेवाएं न होने पर उन पर नोटिस जारी करते हुए सेवा समाप्त किये जाने के निर्देश मुख्य चिकित्साधिकारी को दिया। जिलाधिकारी ने कहा कि जिला अस्पताल में एक चिकित्सक की शिकायतें मिल रही हैं, इनके विरुद्ध जांच कराकर कार्रवाई कराये जाने के निर्देश दिये। कहा, आप समाज के लिए दूसरे भगवान के रूप में जाने जाते है।
इसलिए अपने मर्यादा का ध्यान रखते हुए अनुकूल वातावरण का सृजन कर मरीजों को उचित सेवाएं दें अन्यथा नौकरी छोड़ दें। जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिलाओं के भोजन की गुणवत्ता के बारे में भी निर्देश जिलाधिकारी ने दिए। इसके साथ ही मार्च से अब तक गर्भवती माताओं के बच्चा हो जाने के बाद भी उनके भुगतान नही दिये जाने पर नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि 15 दिन के भीतर उनके भुगतान कराकर पात्रों को मातृत्व लाभ दिलाया जाए। जनपद में आशा कार्यकर्ताओं की नियुक्ति और एएनएम की नियुक्ति पर चर्चा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा की जो भी चयन किया जाए उसमें पूर्ण रूप से पादर्शिता बरती जाए। किसी तरह की कोई गड़बड़ी न हो।
इस बैठक में सीएमओ डॉक्टर एपी श्रीवास्तव, अपर सीएमओ एके मिश्रा, डिप्टी सीएमओ डॉक्टर एमके सिन्हा, डीपीएम विनीत श्रीवास्तव, डीसीपीएम संजीव कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक शिव कुमार ओझा, मनीष कुमार, अभय कुमार तिवारी, जय प्रकाश सहित सभी अधीक्षक उपस्थित रहे।