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Sant Kabir Nagar News: रोडवेज के रंग में रंगी निजी बसें, यात्री खा रहे धोखा

Mon, 22 Apr 2024 12:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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मेंहदावल बाईपास पर सवारी भरने के लिए खड़ी निजी बस। संवाद
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- मेंहदावल बाईपास से भरते हैं सवारी, रोडवेज बस के चक्कर में सवार हो जाते से यात्री
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- कुछ दूर सफर कर लेने के बाद पता चलता है
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। शहर के मेंहदावल बाईपास के अस्थाई बस अड्डा से निजी बस संचालन का बड़ा खेल चल रहा है। इन बसों को रोडवज बसों के रंग में रंगवाया गया है। इससे यात्रियों को जानकारी नहीं हो पाती है कि वो निजी बस में सवार हो रहे हैं या रोडवेज बस में। परिवहन निगम की बसों में सफर करने वाले यात्री भी धोखे में आकर निजी बसों में सवार हो जाते हैं। हकीकत उन्हें टिकट नहीं मिलने पर पता चलती है। ऐसे में यात्री न तो निजी बस से उतर पाते हैं और न ही समय से यात्रा पूरी कर पाते हैं। चालक अपनी मर्जी से कही पर भी बस रोक देता है। जिससे चलते यात्रियों के सफर में विलंब होता है। यह बसें परिवहन निगम को भी हजारों रुपये के राजस्व का चूना लगा रही हैं। जिस पर किसी अधिकारी की नजर नहीं पड़ रही है।
विभाग से जुड़े जानकारों के मुताबिक कई बस मालिकों ने रोडवेज से अनुबंध करवाकर अपनी बसों को चलवाया। अनुबंध समाप्त होने के बाद बसों के संचालन पर रोक नहीं लग पाई। इतना ही नहीं बस मालिकों ने निजी बस का रंग भी अभी तक नहीं बदलवाया नहीं है और बस सड़कों पर फर्राटा भर रही है।
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इसका नतीजा यह है कि रोडवेज बस से सफर करने वाले यात्री बस को दूर से ही देखकर धोखा में आ जाते हैं। बस पकड़ने की जल्दबाजी और भीड़ को देखकर किसी तरह निजी बस में सवार हो जाते हैं। कुछ दूर यात्रा करने और परिवहन निगम का टिकट न मिलने के बाद उनको पता चलता है कि जिस बस में वह सवार हुए हैं वह रोडवेज की बस न होकर निजी है। इसके बाद यात्री मजबूरन आगे की यात्रा करने को विवश हो जाते हैं।
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बोले यात्री

शनिवार को गोरखपुर जाने के लिए बाईपास पर बस पकड़ने आया तो रोडवेज बस के रंग में बस दिखी। उसमे बैठ गए। कुछ दूर जाने पर पता चला कि यह निजी बस है। कई बसें एक रंग की होने की वजह से बस में बैठने के बाद ही पता चलता है कि जिस बस में सवार हैं वह बस निजी है।
- प्रज्ञान मिश्र, यात्री


शहर के मेंहदावल बाईपास पर बस आने के बाद काफी भीड़ होने के वजह से किसी तरह सवार हुए। बस के खलीलाबाद से निकलने और कुछ दूर जाने के बाद कंडक्टर के आने पर पता चला कि बस सरकारी नहीं बल्कि प्राइवेट है।
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- डीपी चंद, यात्री




कुछ बस मालिकों ने विभाग से अनुबंध कराकर बस चलवाया था। अनुबंध समाप्त होने के बाद रोडवेज बस के रंग को नहीं बदलवाया और अभी भी उसी रंग में बस चला रहे हैं। ऐसे बसों के खिलाफ एआटीओ की मदद से जांच अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
- टीएन दूबे, प्रभारी बस अड्डा
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