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Sant Kabir Nagar News: धनंजय के लखनऊ स्थित घर को कुर्क कराने की तैयारी तेज

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संतकबीरनगर। फर्म में निवेश के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी और धोखाधड़ी के मामले में पुलिस अब आरोपी की संपत्तियों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल कुशीनगर निवासी धनंजय शुक्ल के लखनऊ स्थित मकान को कुर्क (जब्त) कराने के लिए पुलिस ने न्यायालय में रिपोर्ट भेज दी है। पुलिस के अनुसार मकान 65 लाख रुपये में खरीदा गया था, जबकि वर्तमान में उसकी अनुमानित कीमत करीब 90 लाख रुपये है। इसे अपराध से अर्जित धन से खरीदना पाया गया है।
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जांच अधिकारी के मुताबिक धनंजय व उसकी प्रेमिका रजनी के नाम चार पर्सनल एवं फर्म के नाम से चार संचालित बैंक खातों का भी पता चला है। हालांकि पुलिस के खातों तक पहुंचने से पहले ही उनमें जमा अधिकतर धनराशि निकाल ली गई । अब खातों के लेन-देन और रकम के अंतिम लाभार्थियों की पड़ताल की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरोह कूटरचित दस्तावेजों के जरिये निवेश का झांसा देकर लोगों से धन जुटाता था। मामले में धनंजय और उसकी महिला सहयोगी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अन्य आरोपियों, संपत्तियों और बैंक खातों की जानकारी जुटाने में लगी है। अधिकारियों का दावा है कि अपराध से अर्जित संपत्तियों को चिह्नित कर कुर्की की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
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संपत्तियों की कुर्की की तैयारी
मुख्य आरोपी धनंजय शुक्ल द्वारा ठगी की रकम से लखनऊ के पारा क्षेत्र (जेबी बैली गार्डन काॅलोनी) में खरीदे गए करीब 90 लाख रुपये के मकान को पुलिस कुर्क (जब्त) कराने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। गिरोह के सदस्यों ने निवेशकों के पैसों से जो भी जमीन, मकान या वाहन खरीदे हैं, उन्हें कुर्क कर पीड़ितों को उनका पैसा वापस दिलाने की कार्रवाई की जा रही है। यह मामला महुली थाना क्षेत्र के हटवा निवासी संतलाल मौर्य द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद प्रकाश में आया था। उन्होंने 51 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया था।
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मुख्य आरोपी और ठगी का तरीका
गिरोह का मुख्य सरगना धनंजय शुक्ल (कुशीनगर निवासी) और रजनी प्रजापति हैं, जो फिलहाल जेल में बंद हैं। आरोपियों द्वारा निवेशकों को 6 से 40 प्रतिशत तक का मुनाफा देने और 180 दिनों तक पैसा रखने पर हर महीने 18 प्रतिशत ब्याज देने का झांसा दिया जाता था। हालिया विवेचना के दौरान पुलिस ने साक्ष्य संकलन कर चार और सक्रिय सदस्यों को प्राथमिकी में नामजद की है, जिनके 16 बैंक खातों को खंगाला जा रहा है। पुलिस जांच में सामने आया कि इस गिरोह का नेटवर्क सिर्फ संतकबीरनगर तक सीमित नहीं था, बल्कि गोरखपुर, सहजनवां, बस्ती, अयोध्या और खलीलाबाद तक फैला हुआ था। जहां इन्होंने दफ्तर खोल रखे थे। इस गिरोह ने अब तक 300 से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बनाकर करीब 22 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया है।
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