संवाद न्यूज एजेंसी
सेमरियावां। मातृ एवं शिशु दर में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की पहल जारी है। इसके तहत अब गर्भवती महिलाओं को प्रसवपूर्व न्यूनतम छह जांच (एएनसी) करानी होगी। इससे पहले नियमित रूप से चार जांच का प्रावधान था। इस संबंध में परिवार कल्याण महानिदेशक ने अधिकारियों को विस्तृत निर्देश दिए हैं। इसका पालन कराने के लिए स्वास्थ्य महकमा सक्रिय हो गया है।
सेमरियावां ब्लाॅक में 113 ग्राम पंचायतें हैं। सीएचसी सेमरियावां के अलावा तीन पीएचसी बूधाकला, दुधारा, दानोकुइयां शामिल हैं। इसके अलावा बाघनगर, दुधारा, सिसवादाखिली, दरियाबाद, टेमारहमत, करही आदि सेंटरों को प्रसव केंद्र बनाया गया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य संभावित स्वास्थ्य जोखिमों की समय पर पहचान, आवश्यक चिकित्सकीय हस्तक्षेप सुनिश्चित करना और मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाना है।
सभी गर्भवती महिलाओं की शत-प्रतिशत प्रसवपूर्व जांच सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण काम है पर नई व्यवस्था से उनकी निगरानी और अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी। अधिकारियों के मुताबिक प्रत्येक गर्भवती तक गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है।
परिवार के सदस्यों को भी गर्भावस्था और नवजात में दिखाई देने वाले खतरे के लक्षणों के प्रति जागरूक किया जाएगा, ताकि आवश्यकता पड़ने पर समय रहते स्वास्थ्य संस्थान से संपर्क किया जा सके।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रत्येक माह की 1, 9, 16 और 24 तारीख को सीएचसी पीएचसी व स्वास्थ्य केंद्रों पर पर गर्भवतियों की जांच कर उच्च जोखिम गर्भावस्था (एचआरपी) की पहचान की जाती है।