- जिले में जगह-जगह गोवर्धन पूजा की गई, भाइयों को तिलक लगाकर आरती उतारी
संतकबीरनगर। दीपावली के बाद जिले में जगह-जगह गोवर्धन की पूजा की गई। महिलाओं और युवतियों ने गोबर से गोवर्धन बनाया। उसे चंदन आदि से टीका लगाकर विधि-विधान से पूजा-पाठ किया। बहनों ने भाइयों को तिलक लगाकर आरती उतारी और लंबी उम्र की कामना की।
खलीलाबाद के पुरानी तहसील के पास गोवर्धन की पूजा की गई। यहां महिलाओं ने गोबर से बने गोवर्धन पर्वत पर अच्छत, चंदन, धूप, दीप से पूजा के बाद भोग चढ़ाया। इस अवसर पर संगीता, पूजा, सुमन आदि मौजूद रहीं।
बखिरा प्रतिनिधि के अनुसार
कस्बे के मंगल बाजार, नई बाजार, शनिचरा बाजार, झीनापुर में गोवर्धन और यम के प्रतीकात्मक चित्र की महिलाओं ने पूजा की और भाइयों के लंबी उम्र की कामना की।
यम पूजा के दौरान महिलाओं ने यम की महिमा की कथा सुनाते हुए कहा कि सूर्यदेव की पत्नी छाया से यमराज और यमुना का जन्म हुआ। यमुना ने भाई यमराज से स्नेहवश कहा कि वे उसके घर आकर भोजन करें, लेकिन हमेशा यम बहन यमुना की बात को टाल जाते थे। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना अपने द्वार पर भाई यम को देखकर प्रसन्न हो गईं और यम का स्वागत-सत्कार किया। भोजन करवाया। प्रसन्न होकर यम ने बहन से वर मांगने को कहा। बहन ने भाई यम से प्रतिवर्ष इस दिन भोजन करने का आग्रह किया और कहा कि इस दिन जो बहन अपने भाई को टीका करके भोजन कराएंगी, उसे आपका भय न रहे। यम ‘तथास्तु’ कहकर यमपुरी चले गए।
ऐसी मान्यता है कि जो भाई आज के दिन यमुना में स्नान करके पूरी श्रद्धा से बहनों के आतिथ्य को स्वीकार करते हैं उन्हें और उनकी बहन को यम का भय नहीं रहता। पूजा के बाद बहनों ने भाइयों को चना खिलाया। रोली, चंदन, अक्षत से भाइयों का तिलक करके उनके दीर्घायु होने की कामना करती हैं। इस अवसर पर भाई अपनी बहनों को वस्त्र, आभूषण एवं दक्षिणा देते हैं। यह पर्व भाई-बहन के आपसी प्रेम-भाव को बनाए रखने के लिए भी मनाया जाता है।