शासन की जल संचय करने की मंशा पूरी होते नहीं दिख रही
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। जल संचयन के उद्देश्य से गांवों में पोखरों की मनरेगा योजना से खुदाई कराई गई। काफी संख्या में पोखरों के सुंदरीकरण का काम चल भी रहा है। इनमें से अधिकतर पोखरे सूख गए हैं। गर्मी भी पड़ने लगी है। ऐसे में आग लगी तो फायर ब्रिगेड को पानी ढूंढना पड़ेगा।
मनरेगा सेल के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 144 पोखरे की खुदाई और सुंदरीकरण का कार्य पूर्ण हो चुका है। 138 पोखरों पर कार्य चल रहा है। इस वित्तीय वर्ष में विकास खंड हैंसर बाजार के 86 और पौली के 56 ग्राम पंचायतों में तालाब की खुदाई की गई। विकास खंड हैंसर बाजार ठाकुराडाडी ग्राम पंचायत के राजस्व गांव अलाईचक में भी तालाब की खुदाई कराई गई। 4,82,000 रुपये मनरेगा मजदूरी के मद में खर्च किए गए, लेकिन तालाब की हालत यह है की मार्च के पहले ही पखवारे में पानी समाप्त हो गया।
ग्रामीण नागेंद्र प्रसाद, रामधनी, सुभाष, मनोज कुमार, प्रभावती देवी आदि का कहना है तालाब की खुदाई की जगह केवल झाड़-झंखाड़ की सफाई की गई। मुश्किल से छह दिनों में आठ से 10 मजदूर कार्य पूरा कर दिए। तालाब गहरा नहीं हुआ और पानी विहीन हो गया। गांव वालों का कहना है की इस तालाब में पहले लबालब पानी भरा रहता था। गांव के पशु गर्मी के महीने में उसमें पानी पीते ही थे।
अगल-बगल के गांव में यदि आग लग जाती थी तो इसी तालाब से दमकल कर्मी पानी भरकर आग पर काबू पाने का काम करते थे। विकास खंड पौली स्थित तमाम तालाब गर्मी आते ही पानी विहीन होने लगे हैं। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी महावीर सिंह ने बताया कि किसी तालाब में यदि पानी नहीं है तो उसमें पानी भराया जाएगा। कार्य मानक के अनुरूप कराया गया है या नहीं, इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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कोट
तालाबों में पानी होना अनिवार्य है। सभी बीडीओ से सूचना मंगाई जाएगी कि कितने पोखरों में पानी की कमी है। जहां-जहां पोखरे सूख गए होंगे अथवा पानी की कमी होगी,वहां पानी भरवाए जाने की व्यवस्था की जाएगी।
- संत कुमार,सीडीओ