- सोमवार को एक्यूआई 110 तो शाम के समय 115 पहुंचा
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। अभी दिवाली का पटाखा भी नहीं फूटा है कि जिले में फिर प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। एक्यूआई 110 पहुंच गया है, जहां यह पिछले दिनों यह 88 पर था। निर्माण कार्यों और सड़क पर उड़ रही धूल के अलावा धुएं से भी प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा है। इधर पर्व पर हुए कार्य और दीपावली पर घरों की सफाई आदि से एक्यूआई का स्तर बढ़ गया है। इसके साथ उड़ रही धूल भी लोगों को परेशान कर रही है, ऐसे में लोग मास्क लगाकर ही निकले।
सुबह-शाम के अलावा रात में ठंड का अहसास हो रहा है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा रही है। साथ ही प्रदूषण ने लोगों को परेशानी और बढ़ा दी है। सुबह और शाम के समय हल्की ठंड का असर है। साथ ही सड़काें पर उड़ रही धूल आदि से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। सोमवार की सुबह एक्यूआई स्तर 110 पहुंच गया। दिन में धूप निकली तो एक्यूआई 97 रहा। शाम के समय फिर 115 पहुंच गया।
इधर सोमवार को अधिकतम 31 डिग्री तो न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दो दिनों से लगातार तापमान में बदलाव के चलते लोग बीमारी की चपेट में भी आ रहे हैं। सर्दी, खांसी और बुखार से पीड़ित मरीज जिला अस्पताल पहुंच रहे है। सड़कों पर धूल उड़ने से भी प्रदूषण हो रहा है और सांस लेने पर गले में चला जाता है। इससे लोगों के गले में खराश हो जा रही है।
जिला अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. एमके सिंह का कहना है कि धूल सबसे खतरनाक होता है। यह नाक और मुंह के रास्ते गले में चला जाता है। ऐसे में लोगों को इससे बच कर रहना चाहिए। लोग मास्क लगाकर ही बाहर निकलें।
एक्यूआई का मानक
- 0 से 50- अच्छा
- 51 से 100- संतोषजनक
- 101 से 200- मध्यम खराब श्रेणी में
- 201 से 300- खराब
- 301 से 400 बहुत खराब
- 401 से 500- गंभीर
धुल और धुएं से घुटने लगता है दम, खुजली भी होती है
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आनंद प्रकाश मिश्र ने बताया कि धूल और धुएं के कण शरीर का हर प्रकार से नुकसान पहुंचाते हैं। इससे एलर्जी की शिकायत होती है। जिन्हें पहले से एलर्जी है, उनके लिए यह धुआं और दिक्कत बढ़ा देता है। ऐसे में धुएं वाली जगह जाने पर दम घुटने लगता है। वहीं धूल के कणों से खुजली होना सामान्य बात है। प्रदूषण हर तरह से शरीर को नुकसान पहुंचाता है। ऐसे में अगर आप बाहर निकल रहे हैं तो मास्क लगा लें। सबसे ज्यादा दिक्कत सुबह के समय आ रही है। सुबह नरमी के चलते प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा रहा है। इससे दमा रोगियों पर खतरा रहा है।
सूर्य के संपर्क में आकर धूल के कण फेफड़ों में चले जाते हैं
एचआरपीजी कॉलेज के भूगोल विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अमर सिंह गौतम ने बताया कि हवा में एक प्रकार से कण धूल उड़ रही है। धूल और वायु नाइट्रोजन ऑक्साइड वाष्पशील कार्बनिक यौगिक और अन्य प्रदूषकों का एक जहरीला संयोजन है, जो जमीन स्तर के ओजोन की घनी परत उत्पन्न करने के लिए सूर्य के प्रकाश के साथ प्रक्रिया करता है। वातावरण में जो धूल उड़ रही है उससे आंखों में जलन हो रहा है। इससे सांस लेने में दिक्कत आती है। धूल के कण सूर्य प्रकाश के संपर्क में आकर फेफड़ों में आसानी से रास्ता खोज लेता है। ऐसे में लोग मास्क का प्रयोग जरूर करें।