मेंहदावल। मेंहदावल कस्बे में जुए के दौरान जाली नोट खपाने के मामले में पुलिस ने आरोपी युवक को हिरासत में ले लिया है। जुए में नकली नोट हारने के आरोपी युवक को मेंहदावल पुलिस ने कस्बे से पकड़ा है। उससे पूछताछ की जा रही रही है।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उसने नकली नोट कहां से लाया। इस धंधे में और कितने लोग शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि नकली नोट के स्राेत का पता लगाया जा रहा है।
दीपावली के दौरान कस्बे में जुए में नकली नोट खपाने की खबर के बाद एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। जाली नोटों के धंधे से जुड़े तार की छानबीन में एजेंसियां जुटी हैं। सूत्र बताते हैं कि जुए का धंधा मेंहदावल कस्बे में काफी सक्रियता के साथ चल रहा है। लाखों का वारा-न्यारा होता है। महराजगंज, सिद्धार्थनगर के अतिरिक्त बहराइच तक के जुआरी आते हैं, और लाखों गंवाकर या जीतकर चले जाते हैं। मेंहदावल कस्बे में जुए का धंधा काफी पुराना है। यहां पर जुआ काफी दिनों से चलता है। जुए के खेल में लगे हुए धंधेबाज यहां पर निरंतर सक्रिय रहते हैं। कारण यह है कि उनकी पहुंच काफी ऊपर तक है और वह सभी को मैनेज करने का पूरा खेल समझते हैं। इसी की बदौलत वह जुए का धंधा ईमानदारी से करते हैं। यहां पर जुआरियों को जुआ खेलने का पूरा संरक्षण मिलता है। जिसकी बदौलत कस्बा जुआरियों की पहली पसंद बन चुका है।
यह जुआ कभी खुले मैदान में होता तो कभी पेड़ों की छांव में। यही नहीं, बंद कमरों में भी जुए का आयोजन किया जाता है। बेखौफ होकर लाखों की बाजी लगती है।
जुआरी भले ही बर्बाद हो जाएं, लेकिन धंधेबाज लगातार मालामाल हो रहे हैं और जुए के धंधे को अंजाम दे रहे हैं।
दीपावली पर्व पर कस्बे में जुआ हुआ। इसके बाद कस्बे का ही एक युवक जुए में बड़े पैमाने पर पैसा हार लिया। उसके जरिए हारे गए नोट को जीतने वाले जब दुकान पर लेकर पहुंचे तो वह नकली निकला। इसके बाद मामला चर्चा में आया गया। मीडिया में खबर आने पर पुलिस भी सक्रिय हो गई और जांच शुरू कर दी।
शनिवार की देर शाम को पुलिस ने आरोपी युवक को हिरासत में लिया। इसके बाद नकली नोट कहा से आया इसकी जांच पड़ताल शुरू कर दी है।
जुआरियों को पैसा देने के लिए तैयार रहते हैं सूदखोर : जुए के दौरान यदि कोई अपने रुपये हार जाता है, तो उनको रुपये देने के लिए सूदखोर भी मौके पर ही तैनात रहते हैं। यह सूदखोर एक सप्ताह का ब्याज पांच से 10 प्रतिशत तक लेते हैं। रुपये देते समय ब्याज की रकम काट लेते हैं।
जुए का अड्डा चलाने वालों को मिलता है पूरा लाभ : जुए के अड्डा की व्यवस्था करने वाले को इसका पूरा लाभ मिलता है। अगर कोई व्यक्ति जुआ खेलने के लिए आता है तो उससे 500 रुपये प्रतिदिन की बैठकी ली जाती है। यही नहीं, दांव पर लगाए गए रुपये अगर कोई जीतता है तो उससे भी दो प्रतिशत कमीशन लिया जाता है।