सांथा क्षेत्र के अतरी नानकार गांव के निलंबित कोटे की दुकान की बहाल में रकम लेने का आरोप एसडीएम पर लगा है। इस संबंध में गांव के लोगों का एसडीएम कार्यालय के सामने दूसरे दिन भी आमरण अनशन जारी रहा। अनशन करने कर लोगों एसडीएम को हटाने की जिद पर अड़े हैं। वहीं अनशन कर रहे लोगों के बीच न तो चिकित्सक पहुंचे न ही कोई अफसर।
आमरण अनशन की अगुआई कर रहे अतरी नानकार गांव निवासी नरेंद्र पांडेय का आरोप है कि मार्च 2016 में गांव के लोगों की शिकायत पर कोटे की दुकान की जांच हुई थी। अनियमितता मिलने पर कोटा निलंबित कर दूसरी जगह अटैच कर दिया गया था। आरोप है कि एसडीएम रामजीवन कोटेेदार के प्रभाव में आ गए और रकम लेकर निलंबित कोटे की दुकान को सात माह बाद बहाल कर दी। एसडीएम की कार्यशैली पर जनता को विश्वास नहीं रह गया है। ऐसे में कोटे की दुकान को निरस्त करते हुए नए सिरे से चयन प्रक्रिया अपनाई जाए। इसके साथ ही एसडीएम के यहां से हटाए जाने तक आमरण अनशन जारी रखा जाएगा। इस दौरान वीरेंद्र सिंह, अवधराज यादव, राम नरेश, राजेश निषाद, कैसरजहां, श्याम धर चौधरी, बालचंद, रमाकांत, बृजेश कुमार पांडेय, खुशियाल, राम प्रसाद सुभावती देवी, विद्यावती देवी, अमरनाथ, रामनरेश, श्यामधर, लालपरी, सरोज, राजेश्वरी, किरन, राजेश, प्रकाश, चंद्रबली, पूर्णमासी, प्रमोद, जगरनाथ आदि मौजूद रहे।
वहीं डीएम सुरेश कुमार ने बताया कि एसडीएम निर्वाचन संबंधी ट्रेनिंग पर गए हैं। मुझसे न तो कोई अभी तक कोई मिला है और न ही शिकायती पत्र दिया गया है। शिकायती पत्र मिलने पर जांच कराई जाएगी। आरोप सही मिला तो उसी के अनुसार कार्रवाई होगी।
वहीं सांथा विकास खंड के ग्राम पंचायत अतरी नानकार के निलंबित कोटा बहाल करने का मामले ने तूल पकड़ लिया है। जहां एक तरफ गांव के कुछ लोग बहाल कोटा को लेकर आमरण अनशन पर बैठे हैं, वहीं दूसरी तरफ कोटेदार के पक्ष में ग्रामीण तहसील कार्यालय पर गुरुवार को प्रदर्शन कर बहाल कोटे को जायज ठहराया। ग्रामीण बबलू, मुन्नी लाल, भोला, लालमन आदि के नेतृत्व में ग्रामीणों ने तहसील परिसर में प्रदर्शन करते हुए कहा कि सात माह से कोटा निलंबित होने के कारण हमें दूसरे गांव में खाद्यान्न लेने जाना पड़ता था। जब कोटेदार के ऊपर पांच सौ रुपये का जुर्माना लगाकर कोटा बहाल कर दिया तो पंचायत चुनाव की रंजिश में लोग कोटेदार के विरुद्ध राजनीति द्वेष से आरोप लगाते हुए निलंबित कराने का षड़यंत्र रच रहे हैं। जबकि लोग कोटेदार की वितरण व्यवस्था से खुश है। इस दौरान मौके पर पहुंचे तहसीलदार वंदना पांडेय को ग्रामीणों ने अपनी मांगों का ज्ञापन दिया। इस अवसर पर राधिका, सुमित्रा, शांति, कुटुरा, विनय कुमार पांडेय, कृष्ण चंद पांडेय, हरिशचंद, भगवान दास समेत अन्य मौजूद रहे।
कोटे की दुकान निलंबित हो ः अतरी नानकर की प्रधान गुजराती देवी का आरोप था कि एसडीएम द्वारा रकम लेकर निलंबित कोटे की दुकान बहाल कर दी गई। एक सप्ताह पूर्व
जब उनके द्वारा ग्रामीणों की शिकायत को एसडीएम के संज्ञान में लाते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी, तभी उनका कार्य कोटेदार के पक्ष में था। मेंहदावल तहसील क्षेत्र में अब तक निलंबित तमाम कोटे की दुकान एसडीएम के जरिए धन लेकर बहाल किया गया है। इनका स्थानांतरण करते हुए विभागीय जांच की जानी आवश्यक है। डीएम से मांग है कि इस मामले में गंभीर रुख अख्तियार करते हुए अपने दायित्वों से विमुख हुए एसडीएम को हटाकर जांच कराएं।
आमरण अनशन पर बैठी महिला बेहोश ः मेंहदावल। सांथा क्षेत्र के अतरीनानकार गांव की रहने वाली एसडीएम के खिलाफ आमरण अनशन पर बैठी 52 वर्षीय महिला कैसरजहां पत्नी सहादत अली गुरुवार शाम को बेहोश हो गई। सूचना पर तत्काल एसओ मेंहदावल अटल बिहारी ठाकुर अनशन स्थल पर पहुंच गए और एबुलेंस से महिला को सीएचसी मेंहदावल में भर्ती कराया। बाद में तहसीलदार वंदना पांडेय और एसओ अटल बिहारी ठाकुर अनशनकारियों से बातचीत शुरू की। लेकिन, अनशनकारी डीएम को मौके पर बुलाए जाने की जिद पर अड़े रहे। चिकित्सकों की टीम ने अनशनकारियों का मेडिकल चेकअप भी शुरू कर दिया। वहीं सीएचसी में करीब 50 मिनट के उपचार के बाद महिला की हालत में सुधार हुआ।