सेमरियावां विकास खंड के ग्राम पंचायत बाघनगर में राज्य वित्त एवं तेरहवा वित्त से कराए गए विकास कार्यों में जांच में 8,96,177 रुपये की वित्तीय अनियमितता उजागर हुई है।
जांच कमेटी ने कार्रवाई के लिए डीएम और डीपीआरओ को रिपोर्ट प्रेषित की। शिकायतकर्ताओं ने जांच कराने की मांग को लेकर उच्चाधिकारियों से लेकर हाईकोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया था। जांच टीम को समय से रिकॉर्ड नहीं मिलने की वजह से जांच प्रक्रिया पूरी करने में पांच माह से अधिक का समय लग गया।
ग्राम पंचायत बाघनगर के रहने वाले निहाल अहमद, इंद्रावती आदि ने डीएम को प्रार्थना पत्र देकर गांव में राज्य वित्त एवं तेरहवा वित्त से कराए गए विकास कार्यों में अनियमिता की शिकायत की थी। शिकायतकर्ताओं ने जांच कराए जाने की मांग की थी।
डीएम ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की। डीसी मनरेगा की अध्यक्षता में गठित कमेटी में तत्कालीन बीडीओ के के मिश्र, डीआरडीए के एई सुशील मिश्र और सहायक अभियंता आरईडी को शामिल किया था। जांच कमेटी ने 14 जुलाई 2015 को दस बिंदुओं पर हुई शिकायत की जांच मौके पर जा कर की।
अरबिया मदरसे से मकसूद के चक तक खंडजा कार्य की जांच के दौरान टीम को ग्रामवासियों ने बताया कि यह कार्य लगभग दस वर्ष पूर कराया गया था और वर्तमान प्रधान के कार्यकाल में खंडजे का मरम्मत कार्य नहीं कराया गया। ऐसी दशा में इस कार्य में व्यय धनराशि 83040 रुपये की अनियमितता मिली।
इसी तरह रियाजुल के घर से पावरहाउस तक खंडजा मरम्मत कार्य के नाम पर 156500 रुपये की वित्तीय अनियमितता किए जाने की बात सामने आई। हफीजुल्लाह के घर से इश्तियाक के खल्गा तक एवं लड्डन के घर से बुद्घिराम के घर तक नाली निर्माण कार्य में 146839 रुपये की वित्तीय अनियमितता पकड़ी गई।
इसी तरह शकील के घर से जाहिद के घर तक खंडजा के मरम्मत के नाम पर 356154 रुपये की वित्तीय अनियमितता मिली। बाबूलाल के घर से धोबीघाट तक खडंजा मरम्मत कार्य कराना दर्शा कर 153644 रुपये की वित्तीय अनियमितता किए जाने की बात जांच में सामने आई।
जांच अधिकारी डीसी मनरेगा विनय श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की जांच में कुल 8,96,177 रुपये की वित्तीय अनियमितता मिली हैं। कार्रवाई के लिए डीपीआरओ को जांच रिपोर्ट दी गई है और जांच की प्रति डीएम को भी भेज दी गई है।
उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता ने मामले की जांच कराने के लिए हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था। समय से रिकार्ड न मिलने की वजह से सही तरीके से जांच करके मूल्यांकन करने में थोड़ी देरी जरूर हुई।
डीपीआरओ ने जांच अधिकारियों को रिमांइर भी दिया था। रिकॉर्ड मिलने के बाद जांच प्रक्रिया पूूरी की। जांच में कौन दोषी है,इसका निर्णय डीपीआरओ करेंगे और उसके बाद दोषियों पर कार्रवाई करेंगे।