संतकबीरनगर। जिले में हरियाणा और उत्तराखंड के मिलावट खोर पनीर बना रहे हैं। अक्तूबर माह में लिए सैंपल की रिपोर्ट अब आई है। जिसमे पनीर में पाम ऑयल और मिल्क पाउडर का मिश्रण पाया गया है। हालांकि खाद्य टीम ने उस समय बरामद पनीर को नष्ट करा दिया था। इन मिलावटखोरों के खिलाफ कोर्ट में केस दर्ज कराने की तैयारी शुरू हो गई है।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने 30 अक्तूबर 2024 को भुजैनी स्थित एक पनीर फैक्टरी पर छापा मारा था। वहां पर पनीर का एक नमूना, एक मिल्क पाउडर का नमूना, रिफाइंड तेल का एक नमूना संग्रहित किया था। वहीं पांच क्विंटल मिल्क पाउडर सीज किया था। एक क्विंटल पनीर को नष्ट कराया था। पनीर की फैक्टरी उत्तराखंड का एक व्यक्ति संचालित कर रहा था। इसी तरह उसी दिन मेंहदालव बाईपास से एक पिकअप से पनीर बरामद किया था। यह पनीर हरियाणा से बनाकर लाया गया था।
वाहन में बैठे लोगों ने बताया था कि पनीर को गोरखपुर उतारकर संतकबीरनगर और बस्ती ले जा रहे थे वहां पर भी पनीर देना था। चार क्विंटल पनीर बरामद हुआ था। जिसे टीम ने नष्ट करा दिया था। इसका सैंपल लेकर भेजा था। रिपोर्ट में पनीर में पाम ऑयल और मिल्क पाउडर मिला हुआ पाया गया है। विभाग इनके खिलाफ अब सीजेएम कोर्ट में वाद दायर करने की तैयारी में जुटा है।
नकली-असली की ऐसे करें जांच
असली और नकली पनीर की पहचान उसको हाथों के जरिए मसलकर लगा सकते हैं। अगर आपका पनीर मसलने के बाद टूटकर गिरने लगता है। इस स्थिति में समझ जाइए कि पनीर नकली है। नकली पनीर की पहचान उसको पानी में उबालकर भी कर सकते हैं। इसके लिए आपको पनीर को पानी में उबालने के लिए रखना है। इसके बाद पनीर को पानी से निकालकर ठंडा होने के लिए छोड़ दें। ठंडा होने के बाद आपको पनीर पर सोयाबीन या अरहर का पाउडर डालकर 10 मिनट के लिए छोड़ देना है। ऐसा करने के बाद अगर पनीर का रंग हल्का लाल हो जाता है। ऐसे में आपके द्वारा खरीदा गया पनीर मिलावटी है।
कोट
पनीर, खोआ या कोई भी खाद्य पदार्थ में मिलावट से सेहत को नुकसान होता है। पनीर में मिलावट से यकृत, गुर्दा, हृदय, नेत्र और मानसिक रोग भी होता है। खाद्य पदार्थों की खरीदारी करते समय सतर्क रहना चाहिए।
-डॉ. कुमार सिद्धार्थ, फिजिशियन, जिला अस्पताल
कोट
पनीर में पाम ऑयल और मिल्क पाउडर का मिलना पाया गया है। इन सभी के खिलाफ वाद दायर करने की तैयारी की जा रही है। अभियान लगातार चल रहा है। जहां भी इस तरह की मिलावट आ रही है वहा पर सामग्री को नष्ट करा दिया जा रहा है।
-सतीश कुमार, सहायक आयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन