धनघटा। गांवों में सरकार की सबसे अहम इकाई माने जाने वाले पंचायत सचिवालय बंद पड़े हैं। सचिवालय पर न तो पंचायत सहायक दिखते हैं और न ही किसी को इस बारे में चिंता है। इतना ही नहीं पंचायत सचिवालय में रखे जाने वाले कंप्यूटर आदि प्रधानों के घर की शोभा बढ़ा रहे हैं।
गांव का काम गांव के लोगों का आसानी से गांव में ही हो सके, इसके लिए शासन ने पंचायत सचिवालय में तमाम व्यवस्थाएं की हैं। इसके बावजूद सचिवालय पर ताला लटका होने के कारण गांव के लोगों को काम के लिए ब्लॉक और तहसील का चक्कर लगाना पड़ रहा है, जबकि सरकार ने पंचायत सचिवालय को गांव स्तर पर मिनी प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है।
इसका उद्देश्य है कि पेंशन, आवास, मनरेगा, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, किसान पंजीकरण, शिकायतों और अन्य सेवाओं के लिए ब्लॉक और तहसील न जाना पड़े। हालांकि हकीकत यह है कि सचिवालय नियमित रूप से खुल ही नहीं रहे हैं। ग्रामीण रामनिवास, राघव राम, ईश्वर चंद्र, विद्यासागर, मनमोहन आदि का कहना है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में बनाए गए मिनी सचिवालय बेमतलब साबित हो रहे हैं, जबकि उसकी देखरेख और पंचायत सहायक के मानदेय के रूप में प्रतिवर्ष लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं।
कई प्रधानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पंचायत भवन में रखा जाने वाला सामान सुरक्षित नहीं रहता है। शुरुआती दौर में कई स्थानों पर चोरी भी हो गया है। इसलिए कंप्यूटर आदि को घर पर रखना मजबूरी है।
इस संबंध में एडीओ पंचायत दलसिंगार यादव का कहना है कि पंचायत भवन को नियमित रूप से खोलने के लिए पंचायत सचिव और पंचायत सहायक को निर्देशित किया गया है। अगर कहीं पर पंचायत भवन खुला नहीं मिला तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।