जिला अस्पताल में स्वीकृत दो पद के सापेक्ष तैनात हैं पांच हड्डी रोग विशेषज्ञ व तीन सर्जन
संतकबीरनगर। किसी को यदि गंभीर बीमारी होती है तो वह जिला अस्पताल आता है, लेकिन यहां कहने के लिए हर मर्ज के डॉक्टर होने चाहिए, पर ऐसा नहीं है। यहां हड्डी रोग विशेषज्ञ व सर्जन की भरमार है, लेकिन हार्ट, न्यूरो के विशेषज्ञ नहीं है। इसकी वजह से इन बीमारी के मरीजों को गोरखपुर और लखनऊ इलाज के लिए जाना मजबूरी है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 1200 से 1300 मरीज आते हैं। इसमे सबसे ज्यादा पेट दर्द, हार्ट की समस्या, सिर में दर्द, उल्टी-दस्त, पैर और हाथ में चोट समेत अन्य बीमारी के मरीज होते हैं। हार्ट की समस्या लेकर आने वाले मरीज फिजिशियन को दिखाते और दवा लेते हैं। यदि बीमारी समझ में आ गई तो ठीक है नहीं तो उन्हें गोरखपुर में दिखाने की सलाह चिकित्सक देते हैं।
न्यूूरो के भी चिकित्सक नहीं हैं। इन बीमारी के मरीज गोरखपुर रेफर कर दिए जाते हैं। सोमवार को हार्ट की समस्या लेकर आए महुली निवासी सत्येंद्र यादव, राम फेर का कहना था कि उन्हें हार्ट में परेशानी महसूस हुई तो यहां दिखाने आए, पर डॉक्टर नहीं हैं। ऐसे में फिजिशियन को दिखाया तो उन्होंने मेडिकल कॉलेज में दिखाने की सलाह दी है। यही हाल अन्य मरीजों का भी रहा है।
अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ के दो पद स्वीकृत है, पर पांच चिकित्सक तैनात हैं। सर्जन के दो पद स्वीकृत है और तीन तैनात हैं। यही हाल अन्य विभागों का है, जिस बीमारी के चिकित्सक होने चाहिए वह नहीं हैं और जिस बीमारी के चिकित्सक सीमित होने चाहिए, उनकी भरमार है।
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कोट
हड्डी रोग विशेषज्ञ व सर्जन स्वीकृत पद के सापेक्ष अधिक तैनात हैं। यह तैनाती महानिदेशालय स्तर से हुई है। इसकी सूची भी भेजी जा चुकी है। हार्ट व न्यूूूरो के डॉक्टर की डिमांड महानिदेशालय को भेजी गई है।
-डॉ. ओपी चतुर्वेदी, सीएमएस