पालिसी धारक की वर्ष 2019 में सड़क दुर्घटना में हो गई थी मौत
बीमा की रकम देने में की जा रही थी आनाकानी
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। पालिसी धारक की मौत के बाद उसके आश्रितों को बीमा की रकम देने में बीमा कंपनी आनाकानी कर रही थी। इस मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने भारतीय जीवन बीमा कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया। बीमा कंपनी को बीमित धनराशि समेत कुल 12.75 लाख रुपये अदा करने का आदेश दिया है।
शहर के गांधीनगर निवासी शिवांगिनी सिंह ने अधिवक्ता अन्जय कुमार श्रीवास्तव के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दाखिल कर कहा कि उसके पति शिव विजय सिंह ने 19 अप्रैल 2017 को पांच लाख रुपये का पॉलिसी भारतीय जीवन बीमा निगम से लिया था। उसका मासिक प्रीमियम 1,933 रुपये था। उसके पति छह जुलाई 2019 को मई व जून 2019 तक के प्रीमियम का भुगतान विलंब शुल्क के साथ किया है। 18 अगस्त 2019 को उसके पति की गौतमबुद्धनगर जिले में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई।
बीमा कंपनी ने पालिसी कालातीत होने का हवाला देते हुए दावे की धनराशि देने से इन्कार कर दिया। उन्होंने पति की असमय मृत्यु होने की वजह से दावे की धनराशि पाने के लिए काफी भागदौड़ की, लेकिन कहीं सुनवाई नही हुई। थक-हारकर जिला उपभोक्ता आयोग की शरण लिया।
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार सिंह, सदस्य सुशील देव व महिला सदस्य संतोष ने पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया। परिवादिनी व उसके बच्चों के साक्ष्य के उपरांत एलआईसी के खिलाफ फैसला सुनाया। बीमित धनराशि पांच लाख रुपये व दुर्घटना हित लाभ रुपये पांच लाख, अनुग्रह धनराशि रुपये 2.50 लाख तथा क्षतिपूर्ति व वाद व्यय के रूप में 25 हजार रुपये कुल 12.75 लाख रुपये बीमा धारक के मृत्यु तिथि से वास्तविक भुगतान की तिथि तक आठ प्रतिशत ब्याज साथ 60 दिनों के भीतर परिवादिनी को अदा करने का आदेश दिया।