सांथा। तहसील समेत विकास खंड क्षेत्र के कुछ गांव से होकर गुजर रही गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेस-वे में किसानों की जमीन का अधिग्रहण करते समय मुआवजा उस सर्किल रेट के अनुसार देने की मांग जोर पकड़ने लगी है। सामाजिक कार्यकर्ता ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री व केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर किसानों के साथ हो रहे अन्याय को रोकने के मांग की है।
गोरखपुर से निकलकर पानीपत तक जाने वाला गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे विकासखंड के देवकली, परसा शुक्ल, महिला, परसा माफी, पसाई, फेउसा, प्रतापपुर, जसवाल, रमवापुर, चितरुखिया आदि गांवों से गुजर रहा है। इसमें जिन किसानों की जमीन सरकार अधिगृहीत करेगी, उन्हें सर्किल रेट से चार गुना मुआवजा देने की चर्चा है। लेकिन, अब किसान हबीबुल्लाह, मुहम्मद अमीन, अवधनारायण शुक्ला, विजय कुमार, अजहर सुसेन, अब्दुल मजीद समेत सामाजिक संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। उनकी मांग है कि सरकार जिस सर्किल रेट से स्टांप ड्यूटी लेती है, उसी सर्किल के अनुसार मुआवजा दिया जाए।
सामाजिक कार्यकर्ता मजहर आजाद ने सीएम व केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री को भेजे पत्र में उल्लेख किया है कि प्रदेश के विकास को गति देने के लिए गोरखपुर से पानीपत के लिए 6 लेन का एक्सप्रेसवे प्रस्तावित है। यह एक्सप्रेसवे 22 जिले से होकर जा रहा है। सरकार जमीन के सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा दे रही है, जो हर किसान को स्वीकार है लेकिन इस एक्सप्रेसवे में कुछ ऐसी जमीन भी आ रही है, जो हाईवे तथा चकमार्ग पर है। वहीं कुछ जमीनों पर नए मकान बने हैं। वह मकान से सटी भूमि है जो सरकार इस बहुमूल्य भूमि का मुआवजा भी कृषि भूमि के सर्किल रेट का चार गुना ही दे रही है जो किसानों के साथ अन्याय है। अगर आज हम किसी मकान के बगल या नेशनल हाईवे सड़क पर पिच रोड पर 200 मीटर अंदर जमीन खरीदते हैं तो सरकार हमसे आबादी के सर्किल रेट से स्टांप लेती है, लेकिन अब जब इस जमीन को अधिग्रहण कर रही है तो कृषि भूमि के अनुसार से मुआवजा देती है। सरकार किसानों को उचित मुआवजा न देकर भारत के अन्नदाताओं का शोषण कर रही है।