सेमरियावां। अपना घर बनाने का सपना संजोए लोगों के सामने अब निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतें बड़ी चुनौती बन गई हैं। ईंट, मौरंग, गिट्टी, बालू, सीमेंट और सरिया के दाम बढ़ने से मकान निर्माण का बजट लगातार बढ़ता जा रहा है। सीमित आय वाले परिवारों को निर्माण कार्य शुरू करने से पहले कई बार खर्च का हिसाब लगाना पड़ रहा है।
सेमरियावां ब्लाॅक क्षेत्र के करही, उसराशहीद, सेहुड़ा, दानोकुइयां, दुधारा, चिउटना, सालेहपुर, टेमारहमत, नव्वागांव, कोहरियावां, महुआरी और उंचहराकला समेत विभिन्न चौराहों पर बिल्डिंग मटेरियल की दुकानें हैं। इन पर निर्माण सामग्री खरीदने पहुंच रहे लोगों को पहले की तुलना में अधिक रकम खर्च करनी पड़ रही है।
स्थानीय दुकानदारों के मुताबिक वर्तमान में मौरंग 6200 रुपये ट्राॅली, गिट्टी 8000 रुपये ट्राॅली और बालू करीब 2000 रुपये ट्राॅली बिक रहा है। वहीं सीमेंट की एक बोरी 350 से 400 रुपये तथा सरिया 6300 रुपये क्विंटल तक पहुंच गई है।
निर्माण सामग्री की कीमतों में अंतर गुणवत्ता, ब्रांड और ढुलाई के हिसाब से हो सकता है। दुकानदार आफताब आलम, अब्दुर्रहमान और नूरुल बशर ने बताया कि निर्माण सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे ग्राहकों पर पड़ रहा है। पहले जो लोग चरणबद्ध तरीके से मकान बनवा रहे थे, उन्हें अब सामान खरीदने में अधिक पैसा लगाना पड़ रहा है। कई लोग बजट कम पड़ने के कारण निर्माण कार्य की गति भी धीमी कर रहे हैं।
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बढ़ते खर्च ने बिगाड़ा मकान का बजट
मकान निर्माण में एक साथ कई प्रकार की सामग्री की जरूरत होती है। ऐसे में किसी एक सामग्री के दाम बढ़ने के बजाय मोरंग, गिट्टी, बालू, सीमेंट और सरिया जैसे जरूरी सामान की कीमत अधिक होने से कुल निर्माण लागत पर खासा असर पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्र में मजदूरी और ढुलाई का खर्च अलग से होने के कारण लोगों के सामने आर्थिक दबाव और बढ़ जाता है। जावेद अहमद, तनवीर चौधरी, इरशाद अहमद, शमीम अहमद आदि ने लोगों का कहना है कि घर बनाना पहले से ही बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी है। निर्माण सामग्री के बढ़ते दामों ने इस जिम्मेदारी को और भारी कर दिया है। कई परिवारों को अपनी जमा पूंजी, बचत और अन्य जरूरी खर्चों के बीच संतुलन बनाकर निर्माण कार्य आगे बढ़ाना पड़ रहा है।