अकीदत के साथ अदा की गई ईद ऊल-अजहा की नमाज
लोगों ने नमाज के बाद गले मिलकर बकरीद की मुबारकबाद दी
एक दूसरे के घर मिलने का देर रात तक चलता रहा सिलसिला
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। सोमवार को जनपद में बकरीद अकीदत के साथ मनाया गया। सुबह सात बजे से दस बजे के बीच अलग-अलग समय पर नमाज अदा करने के बाद लोग एक दूसरे से गले मिलकर ईद ऊल-अजहा की मुबारकबाद दी।
खलीलाबाद के मोतीनगर स्थित मस्जिद पर नमाज पढ़ने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। नमाज अदा करने के बाद मुबारकबाद देने का सिलसिला चला। इस दौरान एसडीएम एसपी सिंह, सीओ सदर रमेश कुमार, कोतवाल श्री प्रकाश यादव, एसएसआई मोतीचंद, एसआई आद्या सिंह, राधेश्याम, गोरखनाथ, उमेश चौधरी, पूर्व चेयरमैन जगत जायसवाल, सपा पूर्व जिलाध्यक्ष लोरिक यादव, रामदरस यादव, अब्दुल्लाह, अरशद खान आदि मौजूद रहे। मिलन और बधाई का सिलसिला देर रात तक नगर में भ्रमण के साथ चलता रहा।
इसी प्रकार बंजरिया और बिधियानी ईदगाह पर नमाज पढ़ी गई। जनपद के खलीलाबाद, मेंहदावल और धनघटा तहसील क्षेत्र के ईदगाहों और मस्जिदों में अलग-अलग समय पर नमाज अदा की गई। मगहर प्रतिनिधि के अनुसार कस्बे के शाही जामा मस्जिद, जामिया स्कूल, शीशा मस्जिद शेरपुर, ईदगाह शेरपुर में ईद उल अजहा की नमाज पढ़ी गई। उसके बाद लोगों ने परंपरा के अनुसार निर्धारित स्थलों पर बकरे की कुर्बानी दी। मेंहदावल प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के ईदगाह और मस्जिदों में नमाज अदा की गई। इसके अलावा बरेलवी और देवबंदी गुट के लोगों ने मेंहदावल के जामा मस्जिद में अलग-अलग नमाज अदा की। नमाज अदा कर लोगों ने देश की तरक्की और अमन चैन की दुआ मांगी। इस दौरान पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था चौकस इंतजाम किए थे। ईदगाहों के पास पेयजल की व्यवस्था, साफ-सफाई दुरुस्त रही। प्रमुख मस्जिदों के पास जरूरत के अनुसार पुलिस, पीएसी एवं फायर ब्रिगेड की व्यवस्था की गई थी। बखिरा प्रतिनिधि के अनुसार बखिरा, लेडुआ महुआ, हरदी, झुंगिया, महला, सिहटीकर, हारापट्टी स्थित मस्जिदों में लोगों ने नमाज अदा की। इस दौरान लगे मेले में बच्चों ने मिठाई, खिलौने, आइसक्रीम, गुब्बारे की खरीदारी किया। एक दूसरे के गले मिलकर बधाई दिया व सेवइयां भी खाई। इस दौरान प्रभारी एसओ अखिलानंद उपाध्याय पुलिस बल के साथ मौजूद रहे।
बाघनगर प्रतिनिधि के अनुसार सेमरियावां ब्लॉक के गांव, बाजरों व कस्बों में बकरीद अकीदत के साथ मनाया गया। ईदगाहों में लोगों ने नमाज अदा की। सबसे बड़ी जामा मस्जिद सेमरियावां में ईद की नमाज कारी अख्तर अली नसीमी ने पढ़ाई। मौलाना मुनीर अहमद नदवी बकरीद की अहमियत को बताया। बाघनगर, उसराशहीद, कोहरियावां, दानोकुइयां, महदेव, ऊंचहराकला, सालेहपुर, दुधारा, देवरियानासिर, सेहुड़ा, बुढ़ाननगर, महुआरी, तिलजा, दरियाबाद समेत गांवों की ईदगाहों व मस्जिदों में भी नमाज अदा की गई।
मेले में बच्चों ने की खरीदारी
बकरीद के अवसर पर खलीलाबाद के अंसार टोला, बिधियानी, बंजरिया, पठान टोला आदि जगहों पर लगे मेले में भारी भीड़ लगी रही। बच्चे पूरे दिन मेले में खिलौने और अन्य सामानों की खरीदारी करते रहे। बच्चों ने चाट, मिठाई आदि जायकों का भी लुत्फ लिया।
सतर्कता व सुरक्षा के बीच मुसहरा में अदा की गई नमाज
तीन दिनों तक गांव में तैनात रहेगी फोर्स, त्योहार बाद लोगों को सौंप दिए जाएंगे बकरे
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मसिंहवा। सोमवार को सतर्कता व सुरक्षा के बीच मुसहरा गांव में ईदुल अजहा की नमाज शांति तरीके से अदा की गई। नमाज के बाद लोग अपने-अपने घरों को चले गए। गांव में पुलिस ने दर्जनों संवेदनशील प्वाइंट बनाया है जहां पर पुलिस टुकड़ियों में ड्यूटी दे रही हैं। एसडीएम और सीओ की देखरेख में यहां पर पुलिस तीन दिनों तक शांति व्यवस्था के लिए तैनात रहेगी।
धर्मसिंहवा थाना क्षेत्र के मुसहरा गांव में कुर्बानी के त्योहार का देखरेख उच्च अधिकारी लखनऊ से करते हैं। पल-पल की रिपोर्ट डीजीपी कार्यालय को भेजी गई। गांव से 41 लोगों को शांति भंग में पाबंद किया गया था। एक दिन पूर्व पुलिस व राजस्व कर्मियों ने लोगों के घरों से बकरे निकलवाकर गांव में स्थित एक मदरसे में सुरक्षित रखवा दिया था। पुलिस अभिलेखों में इस गांव में कुर्बानी की परंपरा नहीं है। 2007 में कुछ लोगों द्वारा कुर्बानी कर देने पर विवाद उपज गया था और तब से शांति व्यवस्था के लिए भारी पुलिस बल तैनात की जाती है। सोमवार को गांव में भारी सुरक्षा के बीच लोगों ने नमाज अदा की।
क्या कहते हैं गांव के लोग
मुसहरा गांव निवासी कुर्बान अली, इसहाक, इदरीश, अली हुसैन, मकबूल, मोहम्मद सफीक, तसौव्वर तथा आलमगीर ने बताया कि जब हमारे गांव में कुर्बानी की परंपरा नहीं है तो जबरदस्ती हम गांव में कुर्बानी का त्यौहार नहीं मनाएंगे। लोगों का कहना था कि हमारे देश में तमाम ऐसी परंपराएं थी। जिसका बदलाव कर लोग अमन और चैन के साथ मिलजुल कर रहते हैं। बताया कि कई बार अधिकारियों ने दोनों पक्षों को बैठा कर आपसी सहमति कराने का प्रयास किया लेकिन लोग नहीं माने। हमें विश्वास है कि आने वाले दिनों में हम उन्हें मना लेंगे और मिलकर त्यौहार मनाया जाएगा।