- सत्यापन न होने के चलते छात्रों के नामांकन का नहीं चल पा रहा पता
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। अनिवार्य बाल अधिकार के तहत प्राइवेट स्कूलों में नामांकित गरीब बच्चों का कितना नामाकंन हुआ इसका सत्यापन अभी तक नहीं हो पाया है। इसके लिए अधिकारियों की डयूटी लगी है और वह सत्यापन करने में लापरवाही बरत रहे है। इससे यह पता नहीं चल पा रहा है कितने बच्चों का नामाकंन है। इस वजह से इन स्कूलों में शासन की ओर से दी जाने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति की रकम नहीं पहुंच पा रही है।
अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त विद्यालयों में 25 प्रतिशत नामांकन गरीब छात्रों का होता है। इन छात्रों का नामांकन इन विद्यालयो में आवेदन के बाद बेसिक शिक्षा विभाग करवाता है और उसमे नामांकित छात्रों का सत्यापन किया जाता है। इसके लिए डीएम की तरफ से अधिकारियों की डयूटी लगाई जाती है। जिसमे एडीओ पंचायत, सीडीपीओ, बीईओ समेत अन्य अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाती है। इसके लिए तीन जनवरी को पत्र जारी कर इन स्कूलों का सत्यापन करने को कहा गया था, पर अभी तक बीईओ को छोड़कर अन्य अधिकारियों ने सत्यापन नहीं किया। जिसकी वजह से इन स्कूलों में शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि का आकलन नहीं हो पा रहा है।
बीएसए अमित कुमार सिंह ने बताया कि अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम नामांकित छात्रों का सत्यापन के लिए रिमाइंडर भेजा गया है। एक सप्ताह में सभी विद्यालयों की रिपोर्ट मांगी गई है।