संतकबीरनगर। दशहरा और दीपावली का पर्व शुरू होने वाला है। ऐसे में मिलावट खोर फिर सक्रिय हो जाएंगे। मिठाई, पनीर, खोआ, चावल, छेना आदि की मांग बढ़ जाएगी। अभी होली में लिए गए 29 नमूनों में 19 नमूने फेल मिले हैं। मिठाई में पाउडर दूध तो चावल में एफआरके की मात्रा ज्यादा मिला है। खाद्य विभाग अब इन मिलावट खोरों पर कार्रवाई की तैयारी में जुटा है।
दशहरा और दीपावली पर्व पर मिठाई की डिमांड ज्यादा होती है। दुकानदार भी मिठाई की डिमांड को देखते हुए बाहर से डिब्बाबंद मिठाई मंगाते हैं। ऐसे में उन्हें लेने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है। इसमें केमिकल युक्त पाउडर, सस्ता बनस्पती घी और रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल होता है। यह शहर के तमाम जगहों पर बिकने शुरू हो जाते हैं। जो सेहत के लिए खतरनाक है। मार्च माह में होली के समय खाद्य विभाग ने करीब 29 नमूने लिए थे। जिसमे पनीर, दूध, खोआ, चावल, छेना, पेड़ा आदि शामिल था। इन सभी की जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा था।
प्रयोगशाला से आई रिपोर्ट में इसमें से 19 नमूने फेल हुए हैं। इन खाद्य पदार्थों में मिलावट मिली है। पनीर में फैट कम पाया गया है। इसके साथ ही खोआ में भी मिलावट पाई गई। छेना भी पाउडर से बना पाया गया है। चावल में मिलावट मिली है। जो आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। मिलावट खोर मोटा मुनाफा कमाने के लिए लोगों की सेहत की परवाह तक नहीं करते। दूध एवं उससे बनने वाले मावा, पनीर आदि में मिलावट की सबसे ज्यादा आशंका रहती है। खाद्य सुरक्षा विभाग भी समय-समय पर इसके विरुद्ध अभियान चलाता है।
पांच माह पहले आजाद चौक पर छापेमारी कर एक क्विंटल पनीर बरामद किया था। जो मिलावटी था उसे टीम ने नष्ट करा दिया था। यह पनीर गोरखपुर के खजनी से मंगाई गई थी। ऐसे में लोग आने वाले पर्व पर सावधानी बरते। सोच समझकर ही मिठाई, पनीर और खोआ की खरीदारी करें। लिए गए नमूने जो फेल हुए हैं उसमें खाद्य टीम इन मिलावट खोरों के खिलाफ सीजेएम न्यायालय में वाद दायर करने की तैयारी में है।
नमूनों में यह मिली कमी
पनीर के दो नमूने इसमें फैट नहीं मिला। खोआ के 10 नमूने थे जो पाउडर से बना पाया है। छेना दो नमूना वाह्य पदार्थ पाया गया। जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक था। डिलीसिप्स मिठाई में पाउडर दूध की मिलावट मिली। चावल के दो नमूनों में एफआरके (फोर्टिफाइड राइस कर्नेल) अधिक मात्रा में मिला।
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खराब मिठाई को फिर से बना देते हैं बर्फी
जो मिठाई एक सप्ताह से अधिक हो जाता है और वह खराब हो जाता है तो कारीगर उसे फिर भूनकर चाकलेट बर्फी बनाते हैं। इसमें वह चीनी का प्रयोग करते हैं। इसके बाद यह फिर बिक्री के लिए तैयार हो जाता है। अगर इसका लगातार सेवन किया जाता है तो वह पेट के लिए हानिकारक होता है।
नकली-असली पनीर की ऐसे करें पहचान
सहायक आयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन सतीश कुमार ने बताया कि असली और नकली पनीर की पहचान हाथों से मसलकर लगा सकते हैं। अगर आपका पनीर मसलने के बाद टूटकर गिरने लगता है। इस स्थिति में समझ जाइए कि पनीर नकली है। नकली पनीर की पहचान पानी में उबालकर भी कर सकते हैं। इसके लिए पनीर को पानी में उबालने के लिए रखना है। इसके बाद पनीर को पानी से निकालकर ठंडा होने के लिए छोड़ दें। ठंडा होने के बाद पनीर पर सोयाबीन या अरहर का पाउडर डालकर 10 मिनट के लिए छोड़ देना है। ऐसा करने के बाद अगर पनीर का रंग हल्का लाल हो जाता है तो खरीदा गया पनीर डिटर्जेंट या यूरिया से बनाया गया है।
कोट
मिठाई व पनीर में मिलावट सेहत के लिए नुकसानदेह है। इसमें अगर केमिकल युक्त कलर मिला हुआ है तो वह सीधे लीवर पर असर डालता है। पेट के लिए भी इस तरह के केमिकल नुकसानदायक होते हैं। मिलावटी मिठाई किडनी, लीवर, पेट के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं। ऐसे में इसकी खरीदारी करते समय सतर्कता जरूर बरतें।
- डाॅ. रमाशंकर, वरिष्ठ फिजिशियन जिला अस्पताल
कोट
लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। नमूने लेकर जांच के लिए भेजा जाता है। अधोमानक मिलने पर कार्रवाई भी की जाती है। जो नमूने फेल हुए उनके दुकानदारों पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
- सतीश कुमार, सहायक आयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन