संतकबीरनगर। विद्युत निगम में लाइनमैन अपनी जान जोखिम में डालकर बिजली के खंभों व ट्रांसफार्मर पर चढ़ रहे हैं। उनके पास न ग्लब्ज और न ही सेफ्टी बेल्ट है। जिम्मेदार भी अनदेखा बनकर नियमित उनसे काम ले रहे हैं। कई घटनाओं के बाद भी यह लापरवाही सामने आ रही है।
बिजली निगम में पूरे जिले में 400 से अधिक लाइनमैन हैं। हर मौसम में दिन हो या रात, कहीं भी फाल्ट आने पर लाइनमैन खंभों पर चढ़कर मरम्मत में जुट जाते हैं। कई बार तो लाइन ठीक करते समय ही उन्हें सेफ्टी के पर्याप्त उपकरण न होने से करंट तक लग जाता है। जबकि कुछ लाइनमैनों को शटडाउन के बाद भी घरों में लगे इन्वर्टर व चल रहे जनरेटर का करंट चपेट में ले लेता है।
अधिकांश लाइनमैन बिना सेफ्टी उपकरण के जान जोखिम में डालकर घरों में बिजली पहुंचाने की मशक्कत कर रहे हैं। विभागीय सूत्रों की माने तो लाइनमैनों के पास सुरक्षा उपकरण पूरे नहीं है। काम के लिए एक से दो ही किट दिए जाने बात कही जा रही है। ऐसे में सभी लाइनमैनों को किट न होने से जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ रहा है।
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केस एक
दोनों पैर हुआ फैक्चर
शहर के बंजरिया मोहल्ला में लगभग छह माह पूर्व बिजली संविदा कर्मी बलिराम काम कर रहे थे। बिजली का झटका लगने से वह सीढ़ी से नीचे आ गिरे थे। जिससे उनका दोनों पैर फैक्चर हो गया। जिसके वजह से दो माह बेड रेस्ट करना पड़ा।
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केस दो
पैर का कराना पड़ा ऑपरेशन
खलीलाबाद शहर के एनडी पांडेय गली में लगभग एक वर्ष पूर्व अमित कुमार सीढ़ी के सहारे पोल पर काम करे थे। सेफ्टी बेल्ट न होने के वजह से वह बिजली का झटका लगने से नीचे गिर पड़े और पैर टूट गया। जो ऑपरेशन के बाद सही हो सका।
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केस तीन
मनमाने पन का शिकार हुआ संविदा कर्मी
शहर के इंडस्ट्रियल एरिया के संविदा कर्मी श्रीकांत शुक्ला अधिकारियों के मनमाने पन का शिकार हुए। उनसे 33 केवी लाइन का जंफर लगाने का आदेश दिया गया। जबकि संविदा कर्मी को 11 केवी पर ही अनुरक्षण कार्य करने का आदेश है। पिछले वर्ष जून माह में बिजली का शॉक लगने से वह बुरी तरह झुलस गए। कई महीने तक बेड़ रेस्ट रहकर उपचार कराना पड़ा।
कोट
लाइनमैनों को सेफ्टी किट उपलब्ध कराए जाने के लिए एसडीओ को पत्र लिखा जा चुका है। ठेकेदारों से कहा गया है कि बिना सेफ्टी किट के काम न कराया जाए।
-अमित सिंह, अवर अभियंता