संतकबीरनगर। पंजीकरण, बीमा, सायलेंसर और लाइसेंस नहीं है...प्रदूषण का प्रमाण पत्र भी नहीं है। सड़क पर न तो कोई इन्हें रोकता है और न ही जांच होती है। सिस्टम पर भारी जुगाड़ वाहन शहर में फर्राटा भर रहे हैं। हर चौराहे पर मुस्तैद होने का दावा करने वाली यातायात पुलिस इन वाहनों को देखकर मुंह फेर लेती है। परिवहन विभाग भी इसे लेकर मौन है।
पुरानी बाइक, स्कूटर, ऑटो रिक्शा और पंपिंगसेट के इंजन व पुर्जों से तैयार जुगाड़ वाहन (बाइक ठेला) देहात से लेकर शहर तक की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनका उपयोग कहीं सवारी तो कहीं माल ढुलाई के रूप में किया जा रहा है। यातायात पुलिस और परिवहन विभाग की ओर से ढील देेने से दिनों दिन इन जुगाड़ वाहनों की संख्या जिले में बढ़ती जा रही है। केवल शहर की बात करें तो लगभग 50 से 75 वाहन चल रहे हैं, जिनका उपयोग सीमेंट, बालू, सरिया, रसोई गैस सिलेंडर की ढुलाई से लेकर (गन्ना जूस) मशीन की दुकान लगाने में किया जा रहा है। जुगाड़ वाहन प्रदूषण फैलाने में सबसे आगे हैं।
20 से 25 हजार में बनता है जुगाड़ वाहन
सेमरियांवा, बेलहर और बखिरा क्षेत्र में 20 से 25 हजार में जुगाड़ वाहन बनाया जाता है। इन इलाकों में कई लोगों ने जुगाड़ वाहन बनाने का गैराज खोल रखा है। शहर के कुछ पुराने कबाड़ी भी धड़ल्ले से यह बाइक ठेला बनाने में लगे हैं। जुगाड़ से बने ठेला गाड़ियों में ज्यादातर उन बाइकों का प्रयोग किया जाता है, जिनका पंजीकरण समाप्त हो गया है। शहर में पुराने स्कूटर, बाइक और पंपिंग सेट से बनाए गए माल वाहक वाहनों की भरमार है। पंपिंग सेट से बने जुगाड़ वाहन से गन्ने की पेराई की जाती है।
वाहन की निर्धारित संरचना में बदलाव करना अपराध है
एआरटीओ आन्जनेय सिंह ने बताया कि ठेले में बाइक, स्कूटर या पंपिंग सेट का इंजन जोड़कर चलाना अपराध है। पकड़े जाने पर एआरटीओ और यातायात पुलिस वाहनों को सीज कर देगी। किसी भी वाहन का स्वरूप बदलकर मालवाहक वाहन के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता। जुगाड़ वाहन पर कार्रवाई के लिए अभियान चलाया जाएगा।
बिना पंजीकरण कोई भी वाहन सड़क पर नहीं चल सकता। जुगाड़ वाहन प्रदूषण फैलाने के साथ दुर्घटना का कारण बनते हैं। जिले में अभियान चलाकर जुगाड़ वाहनों पर रोक लगाई जाएगी। इसके लिए सीओ यातायात और प्रभारी यातायात को निर्देश जारी कर दिया गया है।
-सत्यजीत गुप्ता, एसपी