युवा बोले - बाजार में प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें महंगी
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकालय न होने से युवाओं को इसकी कमी खल रही है। युवाओं का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विस्तृत अध्ययन की जरूरत होती है। बाजार में प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें महंगे दामों पर मिलती हैं। इन्हें खरीदने के लिए आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं के लिए लाइब्रेरी की सुविधा न मिलने से प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलना कठिन हो रहा है। युवा कहते है कि जितना अध्ययन करके तैयारी की जाती है उतनी ही आसानी प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र हल करने में होती है। ऐसे में लाइब्रेरी की सुविधा का लाभ उठाने के लिए ग्रामीण क्षेत्र के युवा या तो शहर आने के लिए 15 से 35 किलोमीटर का चक्कर लगाएं या फिर महंगी पाठ्य पुस्तकें खरीदकर तैयारी करें। ऐसे में हर ग्रामीण युवा के लिए यह कर पाना संभव नहीं है।
बोले युवा
एसएससी की तैयार कर रहा हूं। क्षेत्र में लाइब्रेरी न होने पर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अभी वह यू-ट्यूब और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से तैयारी कर रहे हैं। क्षेत्र के बहुत से युवा तो आर्थिक तंगी के चलते ऑनलाइन कोर्स भी नहीं खरीद पाते हैं।
- अभिनव श्रीवास्तव, निवासी, भरपही
प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिस्पर्धा कई गुना बढ़ चुका है। बिना विस्तृत ज्ञान के परीक्षाओं में सफल होना मुश्किल है। किताबें बहुत महंगी हैं, इस कारण नहीं खरीद पाते हैं। शासन को ग्रामीण क्षेत्रों में भी लाइब्रेरी बनानी चाहिए।
- प्रशांत सिंह, निवासी, कटबंध