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Sant Kabir Nagar News: जांच नहीं, सिर्फ निर्देश... सुरक्षा मानकों पर कोचिंग सेंटर फेल

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​वि​धियानी मोहल्ले के एक कोचिंग सेंटर में लगा ​अ​ग्निशमन यंत्र। संवाद
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संतकबीरनगर। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में सिर्फ 27 कोचिंग सेंटर पंजीकृत हैं जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक बताई जा रही है। कई केंद्रों में न तो आपातकालीन निकास (इमरजेंसी गेट) हैं और न ही अग्निशमन उपकरणों की नियमित जांच होती है। अग्निशमन विभाग के रिकाॅर्ड में भी एनओसी शून्य है।
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लखनऊ में हाल ही में हुए हादसे के बाद जिला प्रशासन सतर्क हुआ है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों और कोचिंग सेंटरों की जांच के लिए नोडल अधिकारी नामित करने की तैयारी शुरू कर दी है। वहीं, अग्निशमन विभाग भी सुरक्षा मानकों की पड़ताल और जागरूकता अभियान चलाने की योजना बना रहा है।

जिले में कोचिंग सेंटर, शॉपिंग मॉल व अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच में लापरवाही बरती जा रही है। स्थिति यही रही ताे लखनऊ जैसे हादसे को यहां भी होने से रोका नहीं जा सकता है। फिलहाल राजधानी की दुर्घटना के बाद अग्निशमन विभाग अलर्ट पर है और जांच व जागरूकता अभियान तेज करने की तैयारी में है। शिक्षा विभाग जहां कोचिंग सेंटर व स्कूलों की जांच के लिए नोडल अधिकारी नामित करेगा, वहीं अग्निशमन विभाग भी जांच अभियान शुरू करेगा। अग्निशमन विभाग जांच के साथ लोगों को जागरूक भी करेगा।
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मौका मुआयना: 1
मुखलिसपुर ओवरब्रिज के पास एक कोचिंग सेंटर में जाने पर पाया गया कि सेंटर शीशे से पूरी तरह पैक है। अग्निशमन के उपकरण तो रखे हैं लेकिन आकस्मिक दरवाजा नहीं है। इन उपकरणों की कभी जांच भी होती है, यह कहना मुश्किल है। यहां करीब 55 विद्यार्थी पढ़ने आते हैं।
मौका मुआयना: 2
विधियानी मोहल्ले के एक कोचिंग सेंटर का हाल यह है कि सेंटर खुले में है लेकिन यहां भी कोई इमरजेंसी गेट नहीं है। इसके अलावा अग्निशमन उपकरण देखकर ऐसा लगा कि काफी दिनों से उसकी जांच नहीं की गई है। यही हाल कई और कोचिंग सेंटर का भी है।
मौका मुआयना: 3
मुखलिसपुर ओवरब्रिज के पास एक बड़े शॉपिंग मॉल में अग्निशमन के उपकरण मौजूद दिखे, यहां दो इमरजेंसी गेट हैं, लेकिन जांच व जागरूकता के लिए अग्निशमन विभाग लंबे समय से नहीं आया है। कर्मियों ने बताया कि तीन साल पहले अग्निशमन विभाग ने जांच की थी और हमें जागरूक किया। इसी तरह इसके पड़ोस में एक मिनी मार्ट में पाया गया कि अग्निशमन के उपकरण नहीं हैं और न ही कोई इमरजेंसी गेट है।


उठने लगी कार्रवाई की मांग
लोगों का कहना है कि कई कोचिंग सेंटर बिना जरूरी मानकों के संचालित हो रहे हैं लेकिन जिम्मेदार विभाग लंबे समय से इनकी जांच को लेकर गंभीर नहीं दिख रहा है। लोगों के अनुसार कई कोचिंग सेंटरों में अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास और सुरक्षा के अन्य इंतजाम नहीं हैं। जहां किसी अनहोनी की स्थिति में विद्यार्थियों को बाहर निकालना मुश्किल हो सकता है। कोचिंग सेंटरों के पंजीकरण, भवन की स्थिति और सुरक्षा मानकों की नियमित जांच होनी चाहिए। तनवीर चौधरी, इरशाद अहमद, मकसूद अहमद और संतोष कुमार ने प्रशासन से मांग की है कि कोचिंग सेंटर की जांच कराई जाए। मानकों की अनदेखी करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई हो ताकि लखनऊ जैसी जानलेवा दुर्घटना दोबारा न हो।
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अफसर अब जागे, कर रहे बड़े-बड़े दावे
स्कूल व कोचिंग सेंटर की जांच के लिए नोडल अधिकारी को नामित किया जाएगा। वह क्षेत्रवार जांच कर रिपोर्ट देंगे।
- उपेंद्र कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक
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कोचिंग सेंटर, स्कूल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान व औद्योगिक क्षेत्र में जल्द ही जागरूकता के लिए अभियान शुरू किया जाएगा। इसके लिए कर्मियों की टीम बनाकर कार्रवाई की जाएगी। अभी तक किसी भी कोचिंग संस्था ने एनओसी नहीं ली है।
-अशोक यादव, जिला अग्निशमन अधिकारी

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इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने भी औद्योगिक इकाइयों को किया सतर्क
उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की ओर से भी खलीलाबाद में औद्योगिक इकाइयों को सतर्क किया गया है। कहा गया है कि विद्युत व अग्निशमन सुरक्षा की अपनी-अपनी औद्योगिक इकाइयों में जांच कर लें और किसी तरह की कमी हो तो उसे दुरुस्त करा लें। इसके लिए संबंधित विभाग से तत्काल संपर्क स्थापित कर कमियों को ठीक करा लें, जिससे किसी तरह के हादसे को रोका जा सके। बता दें कि खलीलाबाद औद्योगिक क्षेत्र में 200 से अधिक औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं। उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अरविंद पाठक ने कहा कि औद्योगिक इकाइयों को सतर्कता के निर्देश दिए गए हैं। विद्युत व अग्निशमन की सुरक्षा को जांच कर कमियों को दुरुस्त करने को कहा गया है, जिससे कि किसी भी हादसे को रोका जा सके।
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