राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पर धरना दिया। इस दौरान निषाद समाज को अनुसूचित जाति का दर्जा देने की मांग की गई।
साथ ही आरक्षण की मांग को लेकर मगहर के कसरवल में हुए आंदोलन के समय निषाद नेताओं और कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमे बिना शर्त वापस लेने की मांग की गई।
केस वापस न लेने की स्थिति में आंदोलन की भी बात वक्ताओं ने कही। धरने के बाद प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को दिया गया। राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के मंडल अध्यक्ष बृजेश कुमार निषाद, जिला मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र कुमार निषाद के नेतृत्व में बड़ी संख्या में निषाद समाज के लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और धरने पर बैठ गए।
इस दौरान मंडल अध्यक्ष ने कहा कि निषाद समाज शैक्षणिक, सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है। समाज को सभी राजनैतिक दलों के लोगों ने झूठा आश्वासन देकर धोखा दिया। लेकिन अब समाज के लोग एकजुट होकर आरक्षण हासिल करेंगे। निषाद समाज को अनुसूचित जाति में शामिल किया जाना चाहिए।
इसके लिए कई बार प्रदेश व केंद्र सरकार द्वारा आश्वासन दिया गया। नेताओं कहा कि कसरवल में राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के मुखिया डॉक्टर संजय कुमार निषाद के जन्म दिन में कार्यकर्ता शामिल होने आए थे।
आरोप लगाया कि पुलिस कर्मियों के उकसाने के कारण वहां माहौल बिगड़ा था। इस मामले में जो मुकदमे दर्ज किया गए हैं, उन्हें बिना शर्त वापस लिया जाए। इसके बाद प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को दिया गया।
मांग की गई है कि कसरवल कांड में मारे गए अखिलेश निषाद के परिजनों को 25 लाख की सहायता तत्काल उपलब्ध कराया जाए। आंदोलन के दौरान वाहनों को हुई क्षति की भरपाई कराई जाए। निषाद समाज को अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए।
धरने में धर्मेंद्र निषाद, महेंद्र कुमार निषाद, दिवाकर निषाद, राजेेश निषाद, संगम निषाद, महाबल निषाद, राजेंद्र निषाद, रमापति निषाद, सतिया देवी, बेलावती निषाद, सरिता निषाद, कुसुम निषाद, सुनीता निषाद, अनारपाती निषाद, चीनी निषाद, कौशल्या निषाद, बासमती निषाद, प्रभावती निषाद, सुभावती निषाद, गुज्जा निषाद, जलधारी निषाद, लालदेवी निषाद, गेंना निषाद, फूलमती निषाद सहित तमाम कार्यकर्ता मौजूद रहे।