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Sant Kabir Nagar News: एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित, मरीज बेहाल

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संतकबीरनगर। एनएचएम कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से जिले में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो गई हैं। जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थायी करने और समान कार्य-समान वेतन की मांग को लेकर 1450 कर्मचारियों में से 850 संविदा कर्मचारी हड़ताल पर हैं। स्वास्थ्य विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था की है लेकिन मरीजों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। कई स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ रहा है।
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जिले के जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी, सीएमओ कार्यालय और जन आरोग्य मंदिरों में एनएचएम के तहत कुल 1450 कर्मचारियों की तैनाती है। इनमें फार्मासिस्ट, एएनएम, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, एक्सरे टेक्नीशियन, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) और अन्य कर्मचारी शामिल हैं। इनमें से 850 संविदा कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। हड़ताल के एक सप्ताह बाद भी स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट सकी हैं।
स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्चा लेकर मरीज इलाज के लिए भटकते रहे। कई विभागों में कर्मचारियों के नहीं होने से कामकाज प्रभावित रहा। जांच, दवा और इलाज के लिए मरीजों को एक केंद्र से दूसरे केंद्र का चक्कर लगाना पड़ रहा है। शहरी स्वास्थ्य केंद्रों के साथ ही सीएचसी और पीएचसी पर भी यही स्थिति बनी हुई है।
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जननी सुरक्षा योजना का भुगतान और जन्म प्रमाणपत्र का काम ठप : एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल से सीएचसी और पीएचसी पर जन्म प्रमाणपत्र बनाने का काम भी प्रभावित हो रहा है। संविदा पर तैनात कंप्यूटर ऑपरेटरों के हड़ताल पर रहने से डाटा फीडिंग नहीं हो पा रही है। कई केंद्रों पर उनके कक्ष में ताला लगा है। इससे नवजात बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं, जननी सुरक्षा योजना के तहत होने वाला भुगतान भी प्रभावित हुआ है। लाभार्थियों को भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
148 जन आरोग्य मंदिरों पर लटका ताला : एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल का असर जन आरोग्य मंदिरों पर भी पड़ा है। जिले के 148 जन आरोग्य मंदिरों पर ताला लटका हुआ है। इन केंद्रों पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और एएनएम की तैनाती रहती है। यहां आसपास के गांवों के मरीजों की जांच, इलाज और दवा की व्यवस्था की जाती है। केंद्र बंद होने से मरीजों को सीएचसी और पीएचसी का रुख करना पड़ रहा है। वहां भी संविदा कर्मचारियों की हड़ताल के कारण परेशानी बढ़ गई है। ऐसे में मरीजों को इलाज के लिए जिला अस्पताल तक जाना पड़ रहा है।
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