गोला बाजार में जन साहित्यिक मंच की कवि गोष्ठी हुई-स्रोत आयोजक
संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच के तत्वावधान में रविवार को खलीलाबाद पब्लिक स्कूल के सभाकक्ष में मासिक काव्य गोष्ठी हुई। बतौर मुख्य अतिथि शायर ओम प्रकाश गौतम ने अपनी रचना ..दस्तार बदली न किरदार बदला, न हमने कबीले का सरदार बदला... से गोष्ठी की शुरूआत की।
वरिष्ठ रचनाकार राजेंद्र बहादुर ने श्रम का मीठा फल मिलता है, आज नहीं कल मिलता है, पढ़कर परिश्रम के महत्व पर जोर डाला। कवयित्री ज्योति सिंह अहसास ने ...अहंकार अगर हो जंग अपनों से बेशक हारना अच्छा है, स्वयं की हार को प्रेम से स्वीकारना अच्छा है... सुनाकर अहंकार को त्यागने का संदेश दिया। शायर हकीम मेंहदावली ने ...मझधार में कश्ती है इस पार लगा लो, नफरत की हवा तेज है पतवार संभालो... सुनाकर बैर को मिटाने की बात की। शायर महजर खलीलाबादी ने ...यूं तो दुनिया में हैं सभी तन्हा, कौन होता नहीं है कभी तन्हा... पढ़कर आज के समय में एकाकीपन की तरफ इशारा किया। रहबर मेंहदावली ने ...न जाने कैसी रवानी में रख दिया गया है, मेरे वजूद की पानी में रख दिया गया है... सुनाया, जिसे सराहा गया। हामिद खलीलाबादी ने ...हम इसके लिए अपना सबकुछ ही मिटा देंगे, है जिस्म तिरंगे का और जान तिरंगे की... पढ़कर अपना राष्ट्र प्रेम जाहिर किया। गोष्ठी में सूरज कुंवर सरस, अवधेश पांडेय, हरिभजन सिंह, विपिन जोशी, अविनाश पांडेय, शिवा पांडेय आदि ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।